‘सब मोह-माया है’… फिर 2 करोड़ की गाड़ी क्यों?
चित्रलेखा अपने कथा कार्यक्रमों में लोगों को सांसारिक आकर्षण से दूर रहने और धर्म-भक्ति को जीवन का आधार बनाने की सलाह देती हैं। उनके इसी संदेश के बीच करीब 2 करोड़ रुपये की लग्जरी कार की खबर सामने आने के बाद आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्रवचन और निजी जीवन के बीच यह अंतर क्यों?
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे ‘कथनी और करनी का फर्क’ बता रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति उसके आध्यात्मिक विचारों को अपने आप गलत साबित नहीं करती।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
लग्जरी कार से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद बहस तेज हो गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या धार्मिक कथावाचक के लिए महंगी गाड़ी रखना उनके संदेश के विपरीत है या फिर यह उनका निजी निर्णय है?
हालांकि, कार की वास्तविक कीमत, खरीद की शर्तों और स्वामित्व की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन दावों को फिलहाल तथ्य के बजाय चर्चा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।


































































