राजस्थान में हाई अलर्ट! डेंगू-मलेरिया पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, अस्पतालों को सख्त निर्देश

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Gajendra Singh Khinvsar

Gajendra Singh Khinvsar: जयपुर। मानसून के मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और स्क्रब टाइफस जैसी मौसमी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर कर दिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सभी अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों और फील्ड में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी सतर्कता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं।(Gajendra Singh Khinvsar) उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पतालों में जर्जर भवन, खराब उपकरण, दवाओं की कमी या किसी भी तरह की लापरवाही से जनहानि हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

24 घंटे में WhatsApp पर मिलेगी जांच रिपोर्ट

स्वास्थ्य भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने मौसमी बीमारियों की रोकथाम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा उपकरणों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, जांच सुविधाएं और उपकरण पूरी तरह कार्यशील रहें। हब एंड स्पोक मॉडल के तहत मरीजों को 24 घंटे के भीतर WhatsApp पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए। जिन अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा नहीं है, वहां इन्हें पीपीपी मॉडल पर शुरू करने को कहा गया है।

अस्पतालों की मरम्मत और ट्रॉमा सेंटर पर फोकस

खींवसर ने कहा कि प्रदेशभर के अस्पतालों में रिपेयर और मेंटेनेंस का कार्य समय पर पूरा किया जाए ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना न हो। उन्होंने सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) और ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता एक महीने के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी

बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित जांच और सुरक्षित प्रसव तक निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के सभी डिलीवरी पॉइंट्स पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मेंटरिंग शुरू कर दी गई है और ‘प्रसव सखी’ कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को बेहतर सहायता दी जा रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मरीजों को समय पर इलाज व सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

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