New Delhi: भारत में गरीबी उन्मूलन को लेकर विश्व बैंक के हालिया अध्ययन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के लिए नए अवसरों का दौर है।
विश्व बैंक के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। इससे अत्यधिक गरीबी दर 90% तक घटकर प्रति 38 भारतीयों में से लगभग 1 रह गई है। वहीं, निचली-मध्यम आय वाली गरीबी सीमा के तहत आने वाली आबादी भी 57.7% से गिरकर 16.1% पर आ गई है। अनुमान है कि यह दर 2028 तक 12.1% पर पहुँच जाएगी।
आर्थिक विषमता मापने वाला ‘गिनी इंडेक्स’ (Gini Index) भी 20% से अधिक घटकर 23.0 पर पहुँच गया है। इस सफलता में मुफ्त अनाज वितरण, मजबूत उपभोग वृद्धि और सामाजिक योजनाओं की मुख्य भूमिका रही है। इसके चलते ऑक्सफोर्ड के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) में गैर-मौद्रिक गरीबी भी 2005-06 के 53.8% से घटकर 16.4% रह गई है।
पिछले छह वर्षों में 13.4 करोड़ नए रोजगार जुड़े हैं, जो कार्यशील आबादी की वृद्धि से लगभग दोगुना हैं। हालांकि, रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले क्षेत्र में गरीबी के केंद्रित होने और ग्रामीण युवा महिलाओं में बेरोजगारी जैसी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। इसके बावजूद, विश्व बैंक ने भारत की इस प्रगति को दुनिया में सबसे तेज सुधारों में से एक माना है।






































































