World News: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. बीते दिन इजरायली वायुसेना ने ईरान के दो प्रमुख परमाणु केंद्रों और दो बड़े स्टील प्लांटों को निशाना बनाया गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए संकल्प जताया है कि इजरायल को इन “अपराधों” के लिए बहुत भारी कीमत चुकानी होगी. इजरायली सेना ने पुष्टि की है कि ये (World News)हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पंगु बनाने और उसकी आर्थिक रीढ़ को तोड़ने के लिए किए गए थे. हालांकि, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया है कि इन हमलों से कोई रेडियोएक्टिव लीकेज नहीं हुआ है और जान-माल का अधिक नुकसान नहीं हुआ.
अब्बास अरागची का तीखा पलटवार
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “इजरायल ने ईरान के दो सबसे बड़े स्टील कारखानों, एक पावर प्लांट और नागरिक परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया है. यह हमला डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई कूटनीति की समय सीमा का उल्लंघन है. इजरायल को अपने इन कृत्यों के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.”
ईरान में कहां-कहां हुआ हमला
इजरायली सेना (IDF) के अनुसार, हमलों में मुख्य रूप से जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें अराक स्थित ‘शाहिद खोंडाब’ हैवी वाटर कॉम्प्लेक्स, याज्द के अर्दकन में स्थित येलोकेक उत्पादन संयंत्र और दक्षिण-पश्चिम ईरान में स्थित ‘खुज़ेस्तान स्टील’ और मध्य ईरान का ‘मुबारकेह स्टील’ प्लांट शामिल है.
ताजा हमले के बाद ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायली हितों से जुड़े औद्योगिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. IRGC ने खाड़ी देशों में काम कर रहे कर्मचारियों को उन जगहों से दूर रहने को कहा है जहां अमेरिकी हिस्सेदारी है. इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए हैं.



































































