Rahul Gandhi: देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation के नए मुखिया के चयन को लेकर हुई हाई-प्रोफाइल बैठक अब राजनीतिक तूफान में बदल गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi, भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता (Rahul Gandhi) की मौजूदगी वाली इस अहम बैठक में ऐसा टकराव हुआ कि राहुल गांधी ने सीधे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए।
राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया को “पहले से तय स्क्रिप्ट” बताते हुए अपना डिसेंट नोट सौंप दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में साफ कहा कि विपक्ष के नेता की भूमिका सिर्फ “रबर स्टैंप” बनकर सरकार के फैसलों पर मुहर लगाने की नहीं है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार Central Bureau of Investigation जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए कर रही है।
चयन प्रक्रिया पर राहुल गांधी ने क्या उठाए सवाल?
राहुल गांधी का आरोप है कि सिलेक्शन कमेटी के सामने उम्मीदवारों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज समय पर पेश ही नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की सेल्फ-अप्रेजल रिपोर्ट और 360-डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट तक उपलब्ध नहीं कराई गईं।
उनके मुताबिक, बैठक के दौरान अचानक 69 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड्स देखने को कहा गया, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं था। राहुल गांधी ने इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कहा कि जानकारी छिपाने का मकसद सरकार के “पहले से तय उम्मीदवार” को आगे बढ़ाना था।
‘लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है यह प्रक्रिया’
प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने पत्र में राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा कि चयन समिति को जरूरी जानकारी से दूर रखकर पूरी प्रक्रिया को सिर्फ औपचारिकता बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो आंख बंद करके हर सरकारी फैसले पर मुहर लगा दे।
राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया को “पक्षपाती” बताते हुए कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस पर गहरी असहमति दर्ज कर रहे हैं।
पहले भी उठा चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने Central Bureau of Investigation चीफ की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हों। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले 5 मई 2025 की बैठक में भी उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। साथ ही 21 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के सुझाव भी दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
































































