women reservation bill: संसद के बजट सत्र में एक अहम मोड़ तब आया जब लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को 16 अप्रैल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. सरकार इस विस्तारित सत्र में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण(women reservation bill) देने से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी में है.
सरकार इस दिशा में दो बड़े संवैधानिक बदलावों पर विचार कर रही है. पहला, महिला आरक्षण को तय समय सीमा से पहले लागू करना, जो मौजूदा प्रावधानों के अनुसार 2029 के बाद संभव था. दूसरा, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव.
इस समय विधेयक लाना
इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद तेज हो गए हैं. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और माकपा जैसे विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए बैठकों का बहिष्कार किया है. विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों के संदर्भ में इस समय विधेयक लाना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है. साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि यदि सरकार गंभीर थी, तो पहले कदम क्यों नहीं उठाए गए.
वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार महिलाओं से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसका चुनावी राजनीति से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील की. सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी स्पष्ट किया कि विधायी कार्यों का समय तय करना सरकार का अधिकार है.
सत्र 18 अप्रैल तक चल
संकेत हैं कि संसद का यह विस्तारित सत्र 18 अप्रैल तक चल सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. सरकार ने चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने के विपक्ष के सुझाव को भी खारिज कर दिया है, जिससे यह साफ है कि विधेयक को जल्द कानून का रूप देने की तैयारी जारी है.
बता दें, अप्रैल में बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव हैं. इन सभी राज्यों के चुनाव के नतीजे 4 मई को जारी किए जाएंगे.


































































