मुसलमान जिंदा हैं, मिटने वाले खुद मिट गए! मदनी का भागवत पर तीखा वार…जानें क्या बोले

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Political Controversy: नई दिल्ली/लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान ने देश की सियासत और सामाजिक विमर्श को एक बार फिर गर्म कर दिया है। 17 फरवरी को लखनऊ में दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय मुसलमानों की “घर वापसी” का उल्लेख किया, जिसके(Political Controversy) बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के मुसलमान अपनी आस्था और पहचान के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी समुदाय को डराने या दबाव में लाने की कोशिश न तो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है और न ही संविधान की भावना के अनुकूल।

सोशल मीडिया के जरिए विरोध

मदनी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि बीते दशकों में इस तरह की बातें खुले मंच से नहीं कही गईं, लेकिन अब करोड़ों मुसलमानों की “घर वापसी” की चर्चा सार्वजनिक रूप से हो रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो कुछ लोग ही देशभक्ति का पैमाना तय करने लगे हों।

संविधान और सामाजिक सौहार्द का सवाल

मदनी ने कहा कि जो विचार देश को विभाजन और नफरत की ओर ले जाएं, वे राष्ट्रहित में नहीं हो सकते। उन्होंने हिंसा और लिंचिंग की घटनाओं को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की आक्रामकता स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, भारत की एकता और अखंडता तभी सुरक्षित रह सकती है जब संविधान की भावना और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान किया जाए।

बढ़ती बयानबाजी के संकेत

भागवत के बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई समूह इसे सामाजिक सौहार्द से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस विषय पर और बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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