सीजफायर पर पाकिस्तान का दावा झूठा! अमेरिका ने शहबाज शरीफ को किया बेनकाब

8
world news

world news: अमेरिका और ईरान के बीच हुए कथित सीजफायर समझौते को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दावों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि ईरान और अमेरिका के साथ लेबनान समेत सभी पक्ष दो हफ्ते के युद्धविराम पर राजी हो गए हैं. लेकिन व्हाइट हाउस ने तुरंत उनके इस दावे को खारिज करते हुए (world news)साफ कर दिया कि लेबनान कभी भी इस समझौते का हिस्सा नहीं था. अमेरिका के इस बयान के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और इसे ईरान को गुमराह करने वाली कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

इजरायल के जरिए जंग जारी रखना…

सीजफायर के ऐलान के बावजूद इजरायली सेना ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले और तेज कर दिए हैं जिसने समझौते की नींव हिला दी है. इसके विरोध में ईरान ने गुस्से में आकर फिर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला किया है जिसे हाल ही में व्यापार के लिए खोला गया था. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शहबाज शरीफ की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए अमेरिका पर दबाव बनाया है कि उसे तय करना होगा कि वह शांति चाहता है या इजरायल के जरिए जंग जारी रखना चाहता है. ईरान का कहना है कि दुनिया देख रही है कि अमेरिका अपने वादों पर कितना कायम रहता है.

तीन बड़ी शर्तों का उल्लंघन

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने मुख्य प्रस्ताव की तीन बड़ी शर्तों का उल्लंघन कर दिया है. उनके अनुसार प्रस्ताव के पहले बिंदु में लेबनान में युद्धविराम की बात थी जिसे अमेरिका और इजरायल ने मानने से इनकार कर दिया है. इसके अलावा ईरान में ड्रोन हमले की कोशिश और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को न मानना भी समझौते के खिलाफ बताया गया है. गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के प्रति ईरान का ऐतिहासिक अविश्वास ऐसे ही धोखे और बार-बार किए गए उल्लंघनों की वजह से है.

अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेगा

व्हाइट हाउस और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ हुए समझौते का लेबनान से कोई लेना-देना नहीं है जिससे स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई है. इजरायल का कहना है कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह को पहले ही बड़ा झटका दिया है और वह अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेगा. इस पूरे घटनाक्रम ने भविष्य की वार्ताओं और 15 दिन के सीजफायर की सफलता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं. अब देखना यह है कि क्या अमेरिका ईरान के दबाव के आगे झुकता है या फिर यह समझौता शुरू होने से पहले ही पूरी तरह से टूट जाएगा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here