“नाम नहीं लिया… लेकिन संदेश दे दिया! गहलोत के ‘लक्ष्मण रेखा’ बयान के पीछे कौन?

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Rajasthan Political News

Rajasthan Political News: जोधपुर। राजस्थान कांग्रेस में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बयानबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नया बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। पहले बीएपी (BAP) कार्यकर्ताओं के कांग्रेस से जुड़ने की चर्चाएं, फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की प्रतिक्रिया और अब गहलोत की “लक्ष्मण रेखा पार नहीं करने” वाली नसीहत ने पार्टी के भीतर चल रही (Rajasthan Political News) हलचल को और तेज कर दिया है। हालांकि गहलोत ने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के बाद कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

कार्यकर्ता समागम में दिया अनुशासन का संदेश

जोधपुर में शहर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता समागम को संबोधित करते हुए अशोक गहलोत ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक विचारधारा की पार्टी है और संगठन की मजबूती के लिए सभी को व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर साथ चलना होगा। गहलोत ने कहा कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता “लक्ष्मण रेखा” पार न करे। संगठन में अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है।

क्या डोटासरा के बयान से जुड़ा है यह संदेश?

गहलोत के इस बयान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि आखिर उनका इशारा किस ओर था। हाल ही में बीएपी के 309 कार्यकर्ताओं के कांग्रेस से जुड़ने की खबरों पर गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि पार्टी में व्यक्तिगत ब्रांडिंग नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जो भी कांग्रेस में शामिल होना चाहता है, उसे पीसीसी कार्यालय आकर औपचारिक रूप से सदस्यता लेनी चाहिए।

डोटासरा ने यह भी कहा था कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट पार्टी के बड़े नेता हैं, लेकिन संगठन का संचालन प्रदेश अध्यक्ष के रूप में वही कर रहे हैं। उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी।

गहलोत पहले ही दे चुके हैं सफाई

बीते दिन अशोक गहलोत ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि बीएपी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली थी, बल्कि वे सिर्फ उनसे मिलने आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में किसी प्रकार की नाराजगी नहीं है और न ही उनके तथा प्रदेश अध्यक्ष के बीच कोई विवाद है।

बयान के बाद फिर तेज हुई राजनीतिक चर्चा

हालांकि गहलोत ने अपने ताजा संबोधन में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “लक्ष्मण रेखा” वाला बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में उनके बयान को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग अर्थ निकाल रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इसे संगठनात्मक अनुशासन का संदेश बताया जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इसे हालिया घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

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