International news: सोकोटो (नाइजीरिया)। पश्चिमी नाइजीरिया के दो गांवों में मंगलवार की शाम जो हुआ, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। हथियारों से लैस इस्लामिक उग्रवादियों ने घरों में घुसकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा। महज़ कुछ घंटों में 162 निर्दोष लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई, (International news) जिससे पूरा इलाका मातम और दहशत में डूब गया है।
सुनियोजित नरसंहार
क्वारा राज्य के वोरो और नुकु गांव अचानक गोलियों की आवाज़ और जलते घरों की लपटों से गूंज उठे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलावरों ने पहले लोगों को इकट्ठा किया और फिर बेरहमी से गोलियां बरसाईं। कई शवों के हाथ बंधे मिले, जिससे साफ है कि यह हमला सिर्फ हिंसा नहीं, बल्कि सुनियोजित नरसंहार था।
क्षेत्र से सांसद मोहम्मद ओमार बियो ने बताया कि इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट से जुड़े लकुरावा सशस्त्र समूह का हाथ है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में यह नाइजीरिया के गांवों पर हुआ सबसे घातक हमला है।
लाशों के बीच अपनों को ढूंढते लोग, रोते बच्चे और राख में तब्दील घर—स्थानीय टीवी चैनलों के फुटेज ने इस त्रासदी की भयावहता दुनिया के सामने रख दी है। रेड क्रॉस के अनुसार, कई दूरदराज इलाकों तक अब भी राहत टीमें नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
उग्रवादी अब आम नागरिकों को
क्वारा राज्य के गवर्नर अब्दुलरहमान अब्दुलरजाक ने इस हमले को “सैन्य कार्रवाई से बौखलाए आतंकियों की कायराना हरकत” बताया। वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उग्रवादी अब आम नागरिकों को निशाना बनाकर डर का माहौल बनाना चाहते हैं।नाइजीरिया पहले ही बोको हरम और इस्लामिक स्टेट से जुड़े अन्य संगठनों की हिंसा से जूझ रहा है।
हाल ही में बोको हरम ने भी सेना बेस और निर्माण स्थलों पर हमले कर 36 लोगों की जान ली थी।इस बीच अमेरिका ने भी प्रतिक्रिया देते हुए नाइजीरिया में सैन्य सलाहकारों की एक टीम भेजी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में बढ़ती कट्टरपंथी हिंसा वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है।आज वोरो और नुकु गांवों में सिर्फ इमारतें नहीं जलीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के सपने, भरोसा और भविष्य भी राख हो गए। सवाल यही है—आखिर कब तक आम लोग आतंक की कीमत चुकाते रहेंगे?



































































