Rajasthan Jan Awas Policy: जयपुर। राजस्थान सरकार की प्रस्तावित नई जन आवास नीति को लेकर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है। जानकारी के अनुसार, नगरीय विकास विभाग इस बार नीति का ड्राफ्ट आम जनता के सुझाव और आपत्तियों के लिए सार्वजनिक किए बिना ही अंतिम रूप देने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है तो यह वर्षों से चली आ रही उस परंपरा से अलग होगा, (Rajasthan Jan Awas Policy)जिसके तहत शहरी विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण नीतियों को लागू करने से पहले सार्वजनिक राय ली जाती रही है।
ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, विभाग का तर्क है कि बिल्डर्स, डेवलपर्स, रियल एस्टेट संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ कई दौर की इन-हाउस बैठकें हो चुकी हैं। ऐसे में दोबारा ड्राफ्ट जारी कर सुझाव और आपत्तियां मांगने से पूरी प्रक्रिया लंबी हो सकती है। हालांकि, अब तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सीधे आमजन से जुड़ा है मामला
नई जन आवास नीति केवल बिल्डरों या डेवलपर्स तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर भू-खंड खरीदारों, आवासीय कॉलोनियों, हाउसिंग परियोजनाओं और शहरी विकास से जुड़े लाखों लोगों पर पड़ेगा। आमतौर पर ऐसी नीतियों के मसौदे सार्वजनिक किए जाते हैं ताकि नागरिक, विशेषज्ञ और विभिन्न संगठन अपने सुझाव दे सकें और अंतिम नीति अधिक व्यावहारिक व संतुलित बन सके।
जनता की राय नहीं लेने पर उठ रहे सवाल
यदि ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया जाता है तो कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे अंतिम नीति में शामिल होने से छूट सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नीति पर एकतरफा होने के आरोप लग सकते हैं। साथ ही, लागू होने के बाद आपत्तियों, कानूनी विवादों और बार-बार संशोधन की स्थिति भी बन सकती है। पारदर्शिता और जनभागीदारी को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
21 महीने बाद भी नहीं मिली मंजूरी
नई जन आवास नीति पिछले करीब 21 महीनों से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है। पहले सरकार और बिल्डर्स के बीच विभिन्न प्रावधानों को लेकर मतभेद रहे और अब प्रशासनिक स्तर पर देरी के कारण नीति अब तक लागू नहीं हो सकी है।
डीएलसी दरों पर भी बढ़ा राजनीतिक विवाद
इस बीच राजधानी जयपुर में डीएलसी दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया कि नई दरों से जमीन, मकान, रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और बैंक ऋण महंगे होंगे, जिससे मध्यम वर्ग, युवाओं और आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी के दौर में लोगों को राहत देने के बजाय सरकार उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रही है। खाचरियावास ने डीएलसी दरों में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस जनता के साथ सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।





































































