Defence Report: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक, जानिए कौन-कौन से देश बेच रहे हथियार

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Defence Report:स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में वैश्विक हथियारों के व्यापार को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत अभी भी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में शामिल है और अब वह वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश बन गया है. इस सूची में पहला स्थान यूक्रेन ने हासिल किया है, (Defence Report:)जिसने हाल के वर्षों में युद्ध के कारण भारी मात्रा में सैन्य उपकरणों की खरीद की है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत अभी भी अपने रक्षा उपकरणों का एक बड़ा हिस्सा रूस से प्राप्त करता है, लेकिन इस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है. इसके साथ ही भारत अब फ्रांस और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने रक्षा सहयोग को तेजी से बढ़ा रहा है.

 रूस भारत का प्रमुख रक्षा

SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि भारत के कुल हथियार आयात का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा अभी भी रूस से आता है. हालांकि यह आंकड़ा पहले की तुलना में कम हुआ है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भारत अब अपने रक्षा आयात को विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

कई दशकों तक रूस भारत का प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण हथियार और सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी मूल के हैं. लेकिन हाल के वर्षों में भारत ने अन्य देशों के साथ भी रक्षा साझेदारी बढ़ाई है ताकि एक ही देश पर निर्भरता कम की जा सके.

फ्रांस बना प्रमुख साझेदार

रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस अब भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार बनकर उभरा है. भारत अपने कुल हथियार आयात का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा फ्रांस से खरीद रहा है.

वर्ष 2021 से 2025 के बीच फ्रांस दुनिया में बड़े हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है और इस दौरान उसका सबसे बड़ा ग्राहक भारत रहा है. दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिसमें लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली और अन्य उन्नत सैन्य तकनीकों का आदान-प्रदान शामिल है.

रूस के हथियारों के प्रमुख खरीदार

SIPRI के आंकड़ों के अनुसार रूस के हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार अभी भी भारत है, जो कुल रूसी हथियार निर्यात का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है.

भारत के बाद चीन करीब 13 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ रूस का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक है. वहीं बेलारूस भी लगभग 13 प्रतिशत के साथ रूसी हथियार खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है.

पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता

रिपोर्ट में पाकिस्तान की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान अब अपने रक्षा उपकरणों के लिए लगभग पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है. पाकिस्तान के कुल हथियार आयात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीन से आता है.

विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इससे क्षेत्र में संभावित दो मोर्चों की चुनौती जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है.

यूक्रेन बना सबसे बड़ा आयातक

SIPRI रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच यूक्रेन दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन गया है. इस अवधि में वैश्विक हथियार आयात में यूक्रेन की हिस्सेदारी लगभग 9.7 प्रतिशत रही है.

यह बदलाव काफी तेजी से हुआ है. वर्ष 2016 से 2020 के बीच यूक्रेन का वैश्विक हथियार आयात में हिस्सा मात्र 0.1 प्रतिशत था. लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा जरूरतों के कारण वहां हथियारों की मांग तेजी से बढ़ी और वह दुनिया का सबसे बड़ा आयातक बन गया.

अमेरिका सबसे बड़ा निर्यातक

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बना हुआ है. वैश्विक हथियार निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत है.

पिछले पांच वर्षों में अमेरिका के हथियार निर्यात में लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिकी हथियारों की मांग तेजी से बढ़ी है.

यूरोप में हथियारों की मांग में बढ़ोतरी

SIPRI रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि यूरोप में हथियारों की मांग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गई है. पिछले पांच वर्षों में यूरोप के देशों द्वारा हथियारों का आयात लगभग 210 प्रतिशत तक बढ़ गया है.

यह वृद्धि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में देखी गई सबसे बड़ी सैन्य गतिविधियों में से एक मानी जा रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते वे अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.

यूरोपीय देशों का बढ़ता रक्षा खर्च

पोलैंड, जर्मनी और नॉर्वे जैसे कई यूरोपीय देश अब अपनी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर खर्च कर रहे हैं. इन देशों ने अपने सैन्य बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है ताकि भविष्य की संभावित चुनौतियों से निपटा जा सके.

यूक्रेन को भी अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों से लगातार सैन्य सहायता मिल रही है. इन देशों ने यूक्रेन को एयर डिफेंस सिस्टम, टैंक, मिसाइल और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए हैं.

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