Vasundhara Raje: राजस्थान की पूर्व सीएम और बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे की पीएम नरेंद्र मोदी से सपरिवार मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में वसुंधरा की नई सियासी पारी को लेकर चर्चा हो रही है. (Vasundhara Raje)लोग अपने-अपने हिसाब से इस मुलाकात का सियासी आकलन कर रहे हैं. वसुंधरा राजे संगठन में ही बनी रहेगी या फिर संसद पहुंचेंगी, इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.
हालांकि वसुंधरा राजे के परिवार और करीबियों का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी से करीब 20 मिनट तक हुई मुलाकात में कोई सियासी चर्चा नहीं हुई. यह मुलाकात सिर्फ जन्मदिन को लेकर थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस अंदाज में अपने ठीक बगल अपनी तरह की ही कुर्सी लगवा कर वसुंधरा राजे को सम्मान दिया, उसकी तस्वीरे सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है.
सुंधरा के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह
गौरतलब है कि वसुंधरा राजे ने सोमवार (9 मार्च) की रात को अपने पूरे परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की थी. इस दौरान वसुंधरा के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह, उनकी पत्नी और बच्चे भी थे. वसुंधरा राजे और उनके परिवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई. परसों यानी 8 मार्च को ही वसुंधरा राजे का जन्मदिन था.
28 फरवरी को भी PM मोदी से मिली थीं वसुंधरा राजे
करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वसुंधरा राजे की प्रधानमंत्री मोदी से इससे पहले मुलाकात 9 दिन पहले ही 28 फरवरी को अजमेर में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में हुई थी. जानकारी के मुताबिक वसुंधरा राजे ने अजमेर के मंच पर ही प्रधानमंत्री मोदी से 8 मार्च को अपने जन्मदिन के मौके पर परिवार समेत मिलने की इच्छा जताई थी. 8 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी की व्यस्तता के चलते यह मुलाकात नहीं हो पाई थी. ऐसे में यह मुलाकात एक दिन बाद यानी कल रात को हुई.
PM मोदी से वसुंधरा की मुलाकात के बाद क्या-क्या अटकलें?
पीएम मोदी से हुई आत्मीय मुलाकात के बाद वसुंधरा राजे को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. पहली यह कि उन्हें पार्टी संगठन में नितिन नवीन की टीम में भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बरकरार रखा जाएगा. हालांकि वसुंधरा राजे खुद संगठन में बने रहने को लेकर बहुत दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं.
दूसरी अटकलें उनके केंद्र सरकार में समायोजन को लेकर है. कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवराज सिंह चौहान, नीतीश कुमार, सर्वानंद सोनवाल और बीसी खंडूरी जैसे नेताओं की तरह उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है. इस बात की संभावना इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि 3 महीने बाद राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं. उन्हें राज्यसभा में भेजकर फिर सरकार में समायोजित किया जा सकता है.
तीसरी संभावना उन्हें किसी बड़े राज्य का गवर्नर बनाए जाने और चौथी राजस्थान में ही कोई जिम्मेदारी देकर फिर से सक्रिय किए जाने को लेकर हैं. हालांकि राजस्थान वापस भेजे जाने का कोई समीकरण फिलहाल सामने नजर नहीं आ रहा है, इसलिए इसकी संभावना न के बराबर है. सूत्रों का दावा है कि गवर्नर की कुर्सी को लेकर उन्हें पहले भी ऑफर दिया गया था, लेकिन उस वक्त वह दुविधा में थी.
फिलहाल कहा जा सकता है कि जन्मदिन के बहाने परिवार के साथ हुई इस मुलाकात ने वसुंधरा राजे के सियासी भविष्य को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है. हालांकि हाईकमान उन्हें किस भूमिका में देखना चाहता है, इसके लिए फिलहाल इंतजार करना होगा.
































































