US Israel joint strikes: तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन: इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री ने ऐसा दावा किया है, जिसने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। नेतन्याहू ने कहा कि हमलों के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर के ठिकाने को निशाना बनाया गया और ( US Israel joint strikes) अब “इजरायल को नष्ट करने की योजना खत्म हो चुकी है।” नेतन्याहू के बयान में यह संकेत भी था कि 86 वर्षीय खामेनेई के हमले में बचने की संभावना बेहद कम है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
ईरान की चुप्पी और विरोधाभासी बयान
इजरायल के दावों के बीच ईरान की ओर से स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। ईरानी विदेश मंत्री
ने कहा कि “जहां तक मेरी जानकारी है, सुप्रीम लीडर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी जीवित हैं।”
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक रूप से कहा है कि सुप्रीम लीडर खामेनेई और राष्ट्रपति
} पूरी तरह स्वस्थ हैं। हालांकि, हमलों के बाद से खामेनेई की कोई सार्वजनिक उपस्थिति या बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं।
अमेरिका की कूटनीतिक सक्रियता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और NATO प्रमुख से बातचीत की है। ट्रंप ने पहले “बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान” की घोषणा करते हुए ईरान की जनता को संबोधित किया था। उनके बयान में यह संकेत था कि क्षेत्र में राजनीतिक बदलाव की संभावनाएं खुल सकती हैं।
दावा बनाम हकीकत: कौन सही?
विश्लेषकों का मानना है कि यह सूचना युद्ध (Information Warfare) का भी हिस्सा हो सकता है। जब तक ईरान की ओर से ठोस दृश्य प्रमाण या आधिकारिक सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आती, तब तक स्थिति को लेकर असमंजस बना रह सकता है।
मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम हालात को और जटिल बना सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं—क्या यह दावा एक नई राजनीतिक वास्तविकता की शुरुआत है या केवल युद्धकालीन बयानबाजी?
नोट: घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापन का इंतजार है।

































































