Ajmer Dargah Case: अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. दरगाह को भगवान शिव का मंदिर बताकर वहां पूजा अर्चना की इजाजत दिए जाने की मांग से जुड़े मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने की अर्जियों पर अजमेर की जिला अदालत ने फैसला सुनाया है. कोर्ट में चार अर्जियों को पक्षकार बनाए जाने के लिए मंजूरी दी गई है. इनमें तीन पक्षकार मुस्लिम पक्ष के और एक हिंदू पक्ष का है.
जिला अदालत ने इसके अलावा 9 अन्य अर्जियों को खारिज कर दिया है. जिन 9 अर्जियों को खारिज किया गया है, कोर्ट ने उन पर 30-30 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया है. हर्जाने की रकम एक महीने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करानी होगी. अदालत ने आज अपने फैसले में दरगाह के दीवान और खादिमों की दो संस्थाओं को पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी है. इसके अलावा हिंदू पक्षकार राज्यवर्धन सिंह को भी पक्षकार बनाए जाने की मंजूरी दी गई है. खादिमों की दोनों संस्थाओं ने पक्षकार बनाए जाने की मंजूरी के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी.
22 जुलाई को सुनवाई करेगी
हाईकोर्ट के निर्देश पर ही जिला अदालत ने दोनों संस्थाओं समेत अन्य अर्जियों पर सुनवाई की थी. खादिमों की दोनों संस्थाओं की तरफ से हाईकोर्ट के वकील आशीष कुमार सिंह ने दलीलें पेश की थी. अजमेर की जिला अदालत दरगाह से जुड़े हुए मूल मुकदमे में अब 22 जुलाई को सुनवाई करेगी. हालांकि मूल मुकदमे के वादी हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने जिला अदालत के फैसले पर असहमति जताई है.
विष्णु गुप्ता ने HC में चुनौती देने की कही बात
विष्णु गुप्ता ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने की बात कही है. उनका कहना है कि बेवजह पक्षकारों को जोड़े जाने से मूल मुकदमे की सुनवाई प्रभावित होगी. मुस्लिम पक्षकारों को दरगाह एक्ट के मुताबिक किसी मामले में पैरवी करने का कोई अधिकार ही नहीं है. इसके अलावा हिंदू पक्षकार राज्यवर्धन सिंह भी गलत तथ्यों के साथ पक्षकार बनना चाह रहे हैं. वह मुकदमे को प्रभावित करना चाहते हैं.



































































