स्कूटी योजना पर सवाल, गहलोत का नाम आते ही विधानसभा में क्यों बढ़ गया सियासी तापमान

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Rajasthan politics

Rajasthan politics: राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही  उस समय गरमा गई जब दिव्यांगों के लिए स्कूटी वितरण योजना पर सवाल-जवाब के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। नेता (Rajasthan politics)प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सरकार के मंत्रियों के बीच तीखी नोकझोंक ने सदन का माहौल राजनीतिक रंग दे दिया।

प्रश्नकाल में उठा स्कूटी वितरण का मुद्दा

मामला तब शुरू हुआ जब बगरू से भाजपा विधायक कैलाश वर्मा ने अपने क्षेत्र में दिव्यांगजनों को स्कूटी नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 20 दिव्यांगों के आवेदन भेजे गए थे, लेकिन वितरण में देरी हुई। साथ ही उन्होंने पूछा कि देरी के कारण स्कूटी की लागत बढ़ने पर क्या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने जवाब दिया, जिससे प्रश्नकर्ता विधायक संतुष्ट नजर आए। लेकिन इसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पूरक प्रश्न पूछते हुए मुद्दे को व्यापक बना दिया।

“इनका क्या लेना-देना?” टिप्पणी से भड़के जूली

जूली के सवाल पर मुख्य सचेतक और कैबिनेट मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह बगरू क्षेत्र का प्रश्न है, इससे जूली का क्या लेना-देना है। इस टिप्पणी पर जूली ने कड़ा प्रतिवाद किया।

“क्या लेना-देना है? मजाक बना रखा है! स्कूटी का मामला पूरे प्रदेश का है। समय पर वितरण नहीं हुआ, लागत बढ़ी—जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी या नहीं?”

अशोक गहलोत का नाम आते ही बढ़ा सियासी तापमान

बहस उस समय और तेज हो गई जब मंत्री अविनाश गहलोत ने जवाब शुरू करने से पहले टिप्पणी की कि आज सवाल पूछने की “कंपिटीशन” इसलिए चल रही है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सदन में मौजूद हैं।

यह सुनते ही टीकाराम जूली अपनी सीट से खड़े हो गए और तीखी प्रतिक्रिया दी…“आप राजनीतिक टिप्पणी मत कीजिए, सवाल का जवाब दीजिए। विधानसभा का मजाक बना रखा है!”

इसके जवाब में मंत्री अविनाश गहलोत ने भी कड़े शब्दों में कहा कि ज्यादा तेज आवाज में बोलने से झूठ सच नहीं हो जाता। कुछ देर तक दोनों पक्षों में तीखी बहस चलती रही।

 योजना से ज्यादा ‘राजनीतिक उपस्थिति’ पर बहस?

आज की कार्यवाही ने यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या विधानसभा में योजनाओं की समीक्षा राजनीतिक उपस्थिति से प्रभावित हो रही है? स्कूटी वितरण योजना जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी का जिक्र सियासी संकेत माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल एक योजना तक सीमित नहीं था, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की झलक भी दे गया। सदन में हुई यह बहस आने वाले दिनों में और राजनीतिक बयानबाजी को जन्म दे सकती है।

फिलहाल, स्कूटी वितरण योजना पर प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल अपनी जगह कायम है, लेकिन आज की कार्यवाही ने साफ कर दिया कि राजस्थान की सियासत में तल्खी अभी कम होने वाली नहीं है।

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