VB-G RAM G: केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G कर दिया और रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने का दावा किया। लेकिन योजना लागू होने के पहले ही महीने के आंकड़े (VB-G RAM G)सरकार के सामने एक असहज सवाल खड़ा कर रहे हैं—अगर रोजगार की गारंटी बढ़ी है, तो काम पाने वाले परिवारों और रोजगार के कुल दिनों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
जुलाई में रोजगार करीब आधा रह गया
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में VB-G RAM G के तहत करीब 7.67 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार दर्ज हुआ। पिछले साल जुलाई में मनरेगा के तहत यह आंकड़ा 15.33 करोड़ पर्सन-डेज था। यानी सालाना तुलना में रोजगार सृजन करीब 49.94 फीसदी कम रहा।
काम मांगने वाले परिवार भी घटे
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में करीब 68.94 लाख ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला। जुलाई 2025 में मनरेगा के तहत करीब 1.42 करोड़ परिवारों को काम मिला था। यानी लाभ पाने वाले परिवारों की संख्या में करीब 51 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
यहीं से राजनीतिक सवाल भी उठता है। सरकार नई योजना में रोजगार की सीमा बढ़ाकर 125 दिन करने को बड़ा बदलाव बता रही है, लेकिन शुरुआती आंकड़े यह दिखा रहे हैं कि योजना के पहले महीने में वास्तविक रोजगार का दायरा काफी छोटा रहा।
सरकार का दावा क्या है?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक जुलाई में करीब 9 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार हुआ और रोजगार मांगने वाले 98 फीसदी से अधिक ग्रामीण परिवारों को काम दिया गया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 95,692 करोड़ रुपये का बजट भी रखा गया है।
125 दिन रोजगार, लेकिन 60 दिन रोकने का प्रावधान
VB-G RAM G के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी दी गई है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में 60 दिनों तक रोजगार रोके जाने का प्रावधान भी है।
अब आने वाले महीनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि जुलाई में दिखी गिरावट महज संक्रमणकालीन असर है या नई व्यवस्था में ग्रामीण रोजगार का स्वरूप वास्तव में बदल रहा है। सरकार के दावों और जमीनी रोजगार के आंकड़ों के बीच यह अंतर आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।


































































