Rajasthan Congress: राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी सियासत की हलचल तेज होती नजर आ रही है। नेताओं के बीच तालमेल, संगठन की भूमिका और पार्टी में फैसले लेने के अधिकार (Rajasthan Congress)को लेकर उठे सवालों ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
बीएपी (भारत आदिवासी पार्टी) के 309 कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद सामने आए घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की अटकलों को हवा दे दी है। जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में यह सियासी कदम उठाया गया, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान ने संगठन बनाम नेताओं की भूमिका पर बहस छेड़ दी है।
डोटासरा का यह कहना कि “पार्टी मैं चला रहा हूं और तय प्रक्रिया के अनुसार ही काम होगा” अब राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नए संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस में फैसलों को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं या यह सिर्फ संगठन को मजबूत करने की कवायद है?
गहलोत-पायलट बड़े नेता लेकिन पार्टी तो मैं चला रहा हूं’
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी में किसी की भी जॉइनिंग होनी है, तो उसकी एक तय प्रक्रिया है-व्यक्ति को पहले कांग्रेस कार्यालय (PCC) आना होता है, तभी विधिवत जॉइनिंग मानी जाती है। लेकिन पता नहीं मालवीय ने क्या सोचा है। डोटासरा ने कैमरे पर यहां तक साफ कर दिया कि चाहे अशोक गहलोत हों या सचिन पायलट, दोनों पार्टी के बड़े नेता हैं, लेकिन संगठन चलाने की जिम्मेदारी उनकी अपनी है। उन्होंने तल्ख लहजे में चेतावनी दी कि बाहर से आकर पार्टी जॉइन करने वालों का स्वागत है, लेकिन अगर उनकी गतिविधियां पार्टी विरोधी रहीं, तो इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मालवीय के सामने ही डोटासरा ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय वापस आ गए हैं तो इनका भी स्वागत हमने किया था। अब इनके साथ जो BAP कार्यकर्ता आए ये पहले गहलोत के आवास पर गए वहां पर पार्टी का दुपट्टा पहना तो पार्टी तो उन्होंने ज्वाइन कर ही ली। मेरा क्या काम इसमें अब ये यहां पर पार्टी का दुपट्टा पहनकर आए हैं तो मैं स्वागत ही करूंगा। मेरे लिए तो कोई काम ही नहीं छोड़ा।






































































