बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम! धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद छोड़ा, भावुक बयान आया सामने

8
Dharmendra Pradhan
Dharmendra Pradhan: नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जारी व्यापक विचार-विमर्श तथा युवा छात्रों की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। (Dharmendra Pradhan)उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को प्रेषित करते हुए स्पष्ट किया कि देश के युवाओं के भविष्य, उनकी आकांक्षाओं और व्यवस्था में निष्पक्षता को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने यह नैतिक कदम उठाया है।

 “जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा….

अपने इस्तीफे के उपरांत जारी एक विस्तृत वक्तव्य में धर्मेंद्र प्रधान ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि  यह निर्णय किसी दबाव में लिया गया कदम नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं, विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के अटूट विश्वास को सम्मान देने की एक नैतिक प्रतिबद्धता है। युवाओं की आकांक्षाओं का सवाल मेरे लिए सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। मैंने अपने संपूर्ण सार्वजनिक जीवन में कभी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा है और न ही चुनौतियों के सामने पीछे हटना मेरी कार्यशैली रही है। जब बात देश के भावी कर्णधारों के भविष्य और संपूर्ण परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की हो, तो पद पर बने रहने से अधिक आवश्यक नैतिक जवाबदेही तय करना हो जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने हमेशा शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, जन-केंद्रित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया है। हालांकि, यदि वर्तमान परिस्थितियों में उनके पद छोड़ने से व्यवस्था में प्रशासनिक सुधारों की प्रक्रिया को नई दिशा मिलती है और छात्रों के बीच विश्वास पुनः सुदृढ़ होता है, तो वे इस निर्णय को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता

पिछले कुछ समय से देश में पारदर्शी परीक्षा तंत्र की स्थापना, परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता सुनिश्चित करने की मांग लगातार उठ रही थी। विभिन्न छात्र संगठनों और युवा वर्ग द्वारा नीतिगत स्तर पर जवाबदेही तय करने और कड़े सुधारात्मक कदम उठाने पर बल दिया जा रहा था।
यद्यपि सरकार की ओर से समय-समय पर प्रणालीगत खामियों को दूर करने, जांच समितियों के गठन और कड़े कानूनों के प्रवर्तन की बात कही जाती रही, परंतु युवाओं के बीच व्याप्त संशय को समाप्त करने और व्यवस्था में व्यापक बदलाव की शुरुआत के रूप में शिक्षा मंत्री के इस निर्णय को बेहद अहम माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here