दुनिया में बढ़ी हलचल, US इंटेलिजेंस रिपोर्ट में पाकिस्तान बना सबसे बड़ा परमाणु खतरा, क्या होगा अगला कदम

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Nuclear Tension

Nuclear Tension: अमेरिकी सीनेट में  प्रस्तुत ‘यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी’ के खतरे के आकलन पर वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत और पाकिस्तान के संबंधों के कारण परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है। चौंतीस पृष्ठों की इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान सीधे संघर्ष शुरू (Nuclear Tension)नहीं करना चाहते फिर भी आतंकवादी तत्वों के लिए संकटों को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं।

पहलगाम के पास हुए आतंकवादी हमले

दस्तावेज में कहा गया है, ”भारत-पाकिस्तान संबंध की वजह से परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है क्योंकि पूर्व में इन दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच टकराव हुए हैं, जिससे तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है। पिछले साल जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश में पहलगाम के पास हुए आतंकवादी हमले ने संघर्ष को भड़काने वाले आतंकवादी हमलों के खतरों को स्पष्ट कर दिया है।”

दस्तावेज में कहा गया है, ”राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से हालिया परमाणु तनाव कम हुआ है और हमारा आकलन है कि कोई भी देश खुले संघर्ष में नहीं लौटना चाहता है लेकिन आतंकवादी तत्वों के लिए संकटों को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं।” दस्तावेज में कहा गया है, ”पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं और सीमा पार झड़पें होती रहती हैं, क्योंकि इस्लामाबाद अफगानिस्तान में पाक विरोधी आतंकवादी समूहों की उपस्थिति से लगातार निराश रहा है, जबकि इस्लामाबाद को बढ़ती आतंकवादी हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।”

पाकिस्तान द्वारा विकसित लंबी दूरी की बैलिस्टिक

अमेरिका की खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने सांसदों को बताया कि पाकिस्तान द्वारा विकसित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में अमेरिका को निशाना बनाने में सक्षम मिसाइलें शामिल हो सकती हैं। सीनेट खुफिया समिति के समक्ष राष्ट्रीय खुफिया निदेशक गबार्ड ने यह भी कहा कि अमेरिका को होने वाले खतरे वर्तमान में 3,000 से अधिक मिसाइलों से बढ़कर 2035 तक 16,000 से अधिक मिसाइलों तक पहुंचने वाले हैं।

गबार्ड ने कहा कि अमेरिका की सुरक्षित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता सामरिक खतरों से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा, ”हालांकि, रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान परमाणु और पारंपरिक पेलोड से लैस कई नवीन, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल वितरण प्रणालियों पर शोध और विकास कर रहे हैं, जो हमारे देश को खतरे की जद में ला सकते हैं।”

 

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