ईरान ने ट्रंप के दावे को ठुकराया, यूरेनियम सौंपने से इंकार, परमाणु समझौते पर तनाव बढ़ा

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Iran rejects Trump claim

Iran rejects Trump claim: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों के बीच अब एक बड़ा विवाद सामने आया है। दरअसल, सारा झगड़ा इस बात पर अटका है कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का क्या किया जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान अपनी परमाणु सामग्री सौंपने को तैयार है, लेकिन ईरान ने इस बात को पूरी तरह गलत बताते हुए विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वे अपना यूरेनियम किसी भी दूसरे देश को नहीं देंगे।(Iran rejects Trump claim) इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों देशों के बीच समझौता होना अभी इतना आसान नहीं है।

शांति समझौता ‘बेहद करीब’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘Truth Social’ प्लेटफॉर्म पर एक सनसनीखेज पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “अमेरिका को वह सारी न्यूक्लियर डस्ट मिलेगी, जो हमारे शानदार B2 बॉम्बर्स ने पैदा की है।” यहां ‘न्यूक्लियर डस्ट’ शब्द ट्रंप ने ईरान के उस यूरेनियम के लिए इस्तेमाल किया, जिसके बारे में उनका दावा है कि पिछले साल अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान यह जमीन में दब गया था। यह हमला जून 2025 में हुआ था, जिसमें अमेरिका ने B2 बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया। ट्रंप का यह दावा सीधे तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ शांति समझौता ‘बेहद करीब’ है और अब कोई रुकावट बाकी नहीं है।

ईरान का सीधा खंडन

ट्रंप के दावे के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने पलटवार किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सरकारी टीवी पर कहा कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम कहीं भी ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत के दौरान ईरान के यूरेनियम को अमेरिका को सौंपने का मुद्दा कभी उठाया ही नहीं गया। बाकाई ने यह भी कहा कि हालिया बातचीत का मुख्य मकसद “इस विवाद को सुलझाना था, ईरान के यूरेनियम को वापस हासिल करना नहीं।”

 संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को

यह विवाद तब सामने आया है जब एक अमेरिकी न्यूज आउटलेट ‘एक्सियोस’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच यूरेनियम ट्रांसफर को लेकर एक योजना पर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपेगा, जिसके बदले में अमेरिका ईरान के जब्त किए गए फंड से 20 अरब डॉलर जारी करेगा। हालांकि, ईरान के बयान से यह स्पष्ट होता है कि ऐसी कोई डील नहीं हुई है, या कम से कम ईरान ऐसी किसी शर्त को मानने को तैयार नहीं है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने यह भी स्वीकार किया कि पिछली बातचीत का मुख्य फोकस परमाणु मुद्दे पर था, लेकिन अब “युद्ध को खत्म करने पर” है। उन्होंने कहा, जाहिर है, अब बातचीत के मद्दों का दायरा काफी बढ़ गया है और इसमें कई तरह के अलग-अलग मुद्दे शामिल हैं।” यह बयान दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत का एजेंडा अब केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य व्यापक मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।

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