चीन के मिसाइल टेस्ट के बाद इंडो-पैसिफिक में बढ़ा तनाव… जानिए क्यों एक्सपर्ट्स इसे सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं मान रहे हैं

6
US China Tension

US China Tension: बैंकॉक। चीन ने हाल ही में दक्षिण प्रशांत महासागर में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसे सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं माना जा रहा, क्योंकि यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल सिस्टम का दुर्लभ परीक्षण था। (US China Tension)इस कदम की कई देशों ने आलोचना की, जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस परीक्षण का सबसे बड़ा संदेश अमेरिका के लिए था। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह घटना पूरे दक्षिण प्रशांत क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।

चीन ने कहां से दागी थी बैलिस्टिक मिसाइल?

सोमवार को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने दक्षिण प्रशांत महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। बताया गया कि यह मिसाइल परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी या न्यूक्लियर सबमरीन से दागी गई थी। इससे पहले भी चीन ने 2 साल पहले प्रशांत महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ऐसा ही परीक्षण किया था। हालांकि इस बार का परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देश लगातार बड़ी शक्तियों से अपने इलाके को सैन्य प्रतिस्पर्धा का मैदान न बनाने की अपील कर रहे हैं।

क्यों माना जा रहा अमेरिका के लिए संदेश?

न्यूक्लियर पॉलिसी एक्सपर्ट और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के वरिष्ठ फेलो टोंग झाओ के अनुसार, इस परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था कि चीन अब एक मजबूत सैन्य शक्ति बन चुका है और उसकी रणनीतिक परमाणु क्षमता लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि,

आखिर क्या है ‘न्यूक्लियर ट्रायड’?

इस परीक्षण के जरिए चीन ने अपनी न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता का प्रदर्शन किया। न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है कि किसी देश के पास तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता हो:

जमीन (Land-based missiles)
समुद्र (Submarine-based missiles)
हवा (Aircraft-based weapons)
जब किसी देश के पास ये तीनों विकल्प होते हैं, तो उसकी परमाणु शक्ति और भी मजबूत मानी जाती है।

क्या होती है ‘सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’?

ऑस्ट्रेलिया के क्रॉफर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के शोधकर्ता डोमिनिक मेघर के मुताबिक, इस परीक्षण से चीन ने अपनी ‘सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ भी दिखाई। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो जाए, तब भी वह जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम रहे। पनडुब्बी से मिसाइल दागने की क्षमता इसी वजह से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि समुद्र में मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होता है।

नए मिसाइल परीक्षण पर चीन ने क्या कहा?

चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य कवायद का हिस्सा था और भविष्य में भी इस तरह के परीक्षण किए जा सकते हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ एशियन रिसर्च के विशेषज्ञ के. ट्रिस्टन टैंग का मानना है कि इसे एक अकेली घटना नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह चीन की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन लगातार परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (IISS) की रिपोर्ट के मुताबिक

परीक्षण के बाद प्रशांत देशों की चिंता क्यों बढ़ी?

दक्षिण प्रशांत महासागर केवल सामरिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह मछलियों और खनिज संपदा से भी समृद्ध क्षेत्र है। इसी वजह से यहां दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच प्रभाव बढ़ाने की होड़ बनी रहती है। लेकिन इस क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों के लिए परमाणु गतिविधियां पुराने दर्द को भी याद दिलाती हैं। अतीत में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस प्रशांत क्षेत्र में कई परमाणु परीक्षण कर चुके हैं। इन परीक्षणों के कारण वहां के लोगों को पर्यावरण प्रदूषण, कैंसर, जन्मजात विकार और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई द्वीपीय देशों का कहना है कि इन परीक्षणों का असर आज भी उनकी नई पीढ़ियों में दिखाई देता है। इसी वजह से प्रशांत क्षेत्र के देशों में परमाणु गतिविधियों को लेकर विशेष संवेदनशीलता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here