पहले दोस्ती, फिर Deepfake ब्लैकमेल… जयपुर में हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप का खुलासा

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Deepfake Blackmail

Deepfake Blackmail: राजधानी जयपुर के सबसे हाई-प्रोफाइल इलाकों में गिने जाने वाले महेश नगर थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कारोबारी जगत और साइबर सुरक्षा एजेंसियों दोनों को चौंका दिया है। यह सिर्फ एक हनीट्रैप केस नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के जरिए चलाए जा रहे संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा माना जा रहा है।

जयपुर पुलिस ने डीसीपी साउथ राजर्षि राज के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए इस रैकेट की मुख्य आरोपी दिशा बाबला को जोधपुर से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपी महिला ने (Deepfake Blackmail)अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक प्रतिष्ठित व्यवसायी को निशाना बनाया और करोड़ों के AI प्रोजेक्ट पर कब्जा करने की साजिश रची।

दोस्ती, भरोसा और फिर डिजिटल जाल

पीड़ित व्यवसायी के अनुसार, दिशा बाबला ने पहले पेशेवर संबंधों और कॉरपोरेट नेटवर्किंग के जरिए विश्वास कायम किया। धीरे-धीरे यह संपर्क निजी बातचीत तक पहुंचा और फिर उसी भरोसे का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया गया।

आरोप है कि आरोपी महिला ने AI टूल्स और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर व्यवसायी की फर्जी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो तैयार किए। इसके बाद सोशल मीडिया, ईमेल और निजी मैसेज के जरिए धमकियां दी जाने लगीं कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो ये वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिए जाएंगे।

करोड़ों के AI प्रोजेक्ट पर थी नजर

शिकायत में दावा किया गया है कि इस पूरे षड्यंत्र का असली मकसद सिर्फ पैसे वसूलना नहीं था, बल्कि पीड़ित के करोड़ों रुपये के AI प्रोजेक्ट पर अवैध कब्जा करना भी था।

पीड़ित का आरोप है कि आरोपी पक्ष लगातार दबाव बनाकर प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकार और आर्थिक हिस्सेदारी हासिल करना चाहता था। जब व्यवसायी ने विरोध किया तो ब्लैकमेलिंग और धमकियों का सिलसिला तेज कर दिया गया।

 

90 लाख की वसूली, फिर 50 लाख की नई डिमांड

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपी गैंग अब तक करीब 90 लाख रुपये वसूल चुका था। इसके बावजूद गिरोह की मांगें खत्म नहीं हुईं।

आरोप है कि बाद में 50 लाख रुपये की अतिरिक्त रकम मांगी गई। पैसे देने से इनकार करने पर झूठे रेप केस में फंसाने, सोशल मीडिया पर बदनाम करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं। लगातार मानसिक दबाव और सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर से पीड़ित लंबे समय तक चुप रहा।

धीरज कुमार बताया जा रहा मास्टरमाइंड

पुलिस जांच में धीरज कुमार नाम के व्यक्ति को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि वही पूरे ऑपरेशन की रणनीति तैयार करता था और ब्लैकमेलिंग की स्क्रिप्ट लिखता था।

महेश नगर थाना के सीआई सुरेश यादव के अनुसार, मुख्य आरोपी दिशा बाबला को जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की तलाश कर रही है।

AI तकनीक के खतरनाक दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण

यह मामला सिर्फ हनीट्रैप या जबरन वसूली तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग किस तरह लोगों की निजी जिंदगी, प्रतिष्ठा और कारोबार को निशाना बना सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के साइबर अपराध और बढ़ सकते हैं, जहां असली और नकली कंटेंट में फर्क करना आम लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। ऐसे मामलों ने डिजिटल सुरक्षा और साइबर कानूनों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

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