राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर को मिला नया चेहरा, खिलाड़ी से मुख्यमंत्री बनने जा रहे युमनाम खेमचंद सिंह

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Manipur New CM

Manipur New CM: इंफाल/नई दिल्ली। हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहे मणिपुर में आखिरकार एक नई शुरुआत की पटकथा लिखी जा चुकी है। करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता और विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुन लिया है। इसका सीधा संकेत है कि अब वही मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

मंगलवार को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हुई मणिपुर (Manipur New CM)विधायक दल की अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, बीजेपी के नॉर्थ-ईस्ट प्रभारी संबित पात्रा और मणिपुर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहे।

चुनाव के बाद युमनाम खेमचंद सिंह को पारंपरिक पटका पहनाकर सम्मानित किया गया और मिठाई खिलाकर बधाई दी गई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की मौजूदगी ने यह संदेश भी दिया कि पार्टी नेतृत्व इस बदलाव को सहज और संतुलित रखना चाहता है।

खेल के मैदान से सत्ता के शिखर तक

मणिपुर की राजनीति में यह एक दिलचस्प संयोग भी है। इससे पहले राज्य की कमान पूर्व फुटबॉलर एन. बीरेन सिंह के हाथों में थी और अब जिम्मेदारी एक अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी संभालने जा रहे हैं।

युमनाम खेमचंद सिंह का सफर बताता है कि अनुशासन, धैर्य और संघर्ष सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि राजनीति और प्रशासन में भी रास्ता दिखाते हैं।

बीरेन सरकार में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी

युमनाम खेमचंद सिंह इंफाल वेस्ट के सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 2022 में बीजेपी सरकार बनने के बाद वे एन. बीरेन सिंह की कैबिनेट में मंत्री बने।

20 मार्च 2022 से फरवरी 2025 तक उन्होंने:

  • नगर प्रशासन एवं आवास विकास (MAHUD)
  • ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज
  • शिक्षा विभाग

जैसे अहम विभागों को संभाला। जमीनी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

विधानसभा अध्यक्ष के रूप में भी निभाई बड़ी भूमिका

राज्य की राजनीति में उनका अनुभव सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं है। 2017 से 2022 तक वे मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) भी रहे। इस दौरान सदन संचालन और विधायी संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका को सराहा गया।

दक्षिण कोरिया से ताइक्वांडो की ट्रेनिंग

54 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह ने ताइक्वांडो की पेशेवर ट्रेनिंग दक्षिण कोरिया से ली। उन्होंने 1977 में इस मार्शल आर्ट की शुरुआत की और करीब 20 वर्षों तक सक्रिय खिलाड़ी रहे।

वे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और भारतीय ताइक्वांडो टीम के कप्तान भी रहे।

5वीं डैन ब्लैक बेल्ट का सम्मान

हाल ही में उन्हें सियोल स्थित ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन द्वारा प्रतिष्ठित 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया।

खिलाड़ी के बाद वे खेल प्रशासक भी बने और ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया।

कोच से नेता बनने तक का सफर

1982 में उन्होंने असम ताइक्वांडो एसोसिएशन की स्थापना की। 1992 में मणिपुर लौटकर कोचिंग शुरू की और राज्य में ताइक्वांडो को संगठित रूप दिया।

2012 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन मात्र 157 वोटों से हार गए। इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और धीरे-धीरे संगठन में मजबूत पकड़ बनाई।

आरएसएस के साथ उनके संबंध और जमीनी सक्रियता ने उन्हें पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में शामिल किया।

उन्हें ही क्यों चुना गया मुख्यमंत्री?

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, युमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे कई वजहें हैं:

  • पार्टी के सभी गुटों को स्वीकार्य चेहरा
  • साफ-सुथरी छवि और विवादों से दूरी
  • शांत, अनुशासित और कामकाजी नेतृत्व शैली
  • मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अनुभव
  • हिंसा के बाद राज्य को स्थिरता देने की क्षमता

मणिपुर के लिए नई उम्मीद

हिंसा, अविश्वास और राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे मणिपुर के लिए युमनाम खेमचंद सिंह का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नई उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि खेल के मैदान में अनुशासन सीखने वाला यह नेता, प्रशासन के मैदान में शांति और स्थिरता कैसे लौटाता है।

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