US Operation: मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग में अब समझौता हो चुका है. अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते के प्रस्ताव पर गुरुवार (18 जून 2026) को साइन कर दिए. हालांकि इसी बीच इस जंग से जुड़ी हैरान करने वाली खबर आई है.
दरअसल, जिस होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ईरान ब्लॉक करके बैठा रहा, वहीं से अमेरिका चुपचाप करोड़ों बैरल तेल निकालकर लेकर ले गया.(US Operation) मजेदार बात यह है कि इसके लिए अमेरिका ने किसी नई तकनीक का नहीं, बल्कि खुद ईरान के ही पुराने पैंतरे का इस्तेमाल किया. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को चकमा देने के लिए उसी के प्लेबुक से शिप-टू-शिप यानी एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करने की कला सीखी है
सैटेलाइट तस्वीरों और शिपिंग डेटा
जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच टकराव बढ़ा, दुनिया के कुल तेल का पांचवां हिस्सा ढोने वाला होर्मुज रास्ता लगभग बंद रहा. ऐसे में अमेरिकी सेना ने कमान संभाली. सैटेलाइट तस्वीरों और शिपिंग डेटा से पता चला है कि मई की शुरुआत से अब तक कम से कम 92 जहाजों के जरिए यह खेल खेला जा चुका है. इस पूरे ऑपरेशन को फुलप्रूफ बनाने के लिए दो खास ठिकानों को चुना गया- यूएई का फुजैराह और ओमान का सोहार तट. ये दोनों जगहें ईरानी नियंत्रण वाले इलाके के बिल्कुल करीब हैं. अमेरिकी सेना की कड़ी निगरानी में यह पूरा काम होता रहा.
ट्रांसपोंडर यानी लोकेशन बताने वाला सिस्टम बंद
यह ऑपरेशन किसी थ्रिलर फिल्म जैसा रहा. जहाजों को एक तय मीटिंग पॉइंट पर भेजा जाता था. होर्मुज के खतरनाक रास्ते पर पहुंचने से पहले जहाज आपस में 3 से 4 किलोमीटर की दूरी बना लेते थे. जैसे ही वे ईरान के दावे वाले इलाके के पास पहुंचते, जहाजों के ट्रांसपोंडर यानी लोकेशन बताने वाला सिस्टम बंद कर दिए जाते और लाइटें डिम कर दी जाती, ताकि वे रडार में न आएं. इसके बाद छोटे टैंकर बड़े जहाजों के बगल में आकर खड़े हो जाते थे.
समुद्र के बीचों-बीच एक से दूसरे जहाज में तेल पलटने के इस काम में 24 से 40 घंटे का समय लगता था. काम पूरा होते ही खाली टैंकर वापस लौट जाते और तेल से भरे बड़े जहाज आगे निकल जाते. ईरान इस तकनीक का इस्तेमाल पाबंदियों से बचने के लिए करता था, लेकिन वह एक बार में एक ही जोड़ा जहाज इस्तेमाल करता था. अमेरिका ने बड़े पैमाने पर यह काम शुरू किया ताकि सुरक्षा मजबूत रहे और ईरान हमला करने की हिम्मत न कर सके.
हेलीकॉप्टर इसी तेल ट्रांसफर मिशन
हाल ही में 9 जून को होर्मुज के पास अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हेलीकॉप्टर इसी तेल ट्रांसफर मिशन को सुरक्षा दे रहा था. घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसके लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि ईरान ने इसे गलती से हुआ हादसा बताया. सैटेलाइट तस्वीरों से साफ हुआ है कि जिस दिन यह हादसा हुआ, ठीक उसी दिन ओमान के सोहार तट के पास छह जोड़ी जहाज इसी तरह तेल ट्रांसफर कर रहे थे.
9 करोड़ बैरल कच्चा तेल
मई से अब तक इस खुफिया नेटवर्क के जरिए लगभग 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स निकाला जा चुका है. हालांकि, यह युद्ध से पहले के रोजाना के 2 करोड़ बैरल के मुकाबले काफी कम है, लेकिन इस संकट के दौर में ग्लोबल एनर्जी मार्केट को चालू रखने के लिए यह अमेरिकी कोशिश बहुत बड़ी राहत लेकर आई. हालांकि, अब अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते हो गया है, जिसके बाद से होर्मुज का ये रास्ता दुनिया के व्यापार के लिए फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.





































































