राजस्थान विद्युत आयोग में आग नहीं खेल हुआ? जली फाइलों ने मचा दिया तूफान

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Electricity Commission Fire: जयपुर में सहकार मार्ग स्थित जयपुर विद्युत विनियामक आयोग की चौथी मंजिल पर बने मीटिंग रूम में दो दिन पहले लगी आग अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। शुरुआती तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट बताया गया और कहा गया कि कुछ रिकॉर्ड जले हैं, लेकिन सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित हैं। हालांकि जब मामले की पड़ताल की गई तो तस्वीर इससे कहीं ज्यादा गंभीर नजर आई। (Electricity Commission Fire) जानकारी सामने आई है कि आग में बाड़मेर की लिग्नाइट खनन कंपनी एसडब्ल्यूएमएल से जुड़े अहम दस्तावेज भी जलकर राख हो गए। ये वही रिकॉर्ड थे जिन्हें कंपनी ने अदालतों के आदेश के बाद बड़ी मुश्किल से आयोग को सौंपा था। ऐसे में बंद मीटिंग रूम में अचानक आग लगना और महत्वपूर्ण फाइलों का जलना अब नए संदेह पैदा कर रहा है।

एक ही कंपनी को वर्षों से खनन का काम, उठे बड़े सवाल

बाड़मेर लिग्नाइट पावर प्रोजेक्ट में करीब 8 इकाइयां संचालित हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता लगभग 135 मेगावाट बताई जाती है। यहां उत्पादित बिजली जोधपुर डिस्कॉम को सप्लाई की जाती है। इस बिजली की दर तय करने का काम जयपुर विद्युत विनियामक आयोग करता है।

लिग्नाइट खनन का कार्य बीएमएलसीएल के माध्यम से कराया जाता है, जो राजस्थान सरकार और जेएसडब्ल्यू समूह का संयुक्त उपक्रम है। इसमें सरकार की 51 प्रतिशत और जेएसडब्ल्यू की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है। साथ ही खनन दर तय करने का अधिकार भी विनियामक आयोग के पास है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब देशभर में कोल ब्लॉक आवंटन कोयला मंत्रालय की प्रक्रिया से होता है, तो राजस्थान में लिग्नाइट खनन का काम वर्षों से एक ही निजी कंपनी को कैसे मिलता रहा? इससे सरकारी राजस्व पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

सरकार को नुकसान, जवाबदेही पर सवाल

सवाल यह भी है कि वर्तमान में लिग्नाइट खनन किस दर पर हो रहा है और उसकी समीक्षा किस आधार पर की जा रही है। आरोप हैं कि जब नई बिडिंग की बात आई, तब भी ठेका फिर उसी समूह से जुड़ी कंपनी एसडब्ल्यूएमएल को मिल गया।

ऐसे में यह भी चर्चा है कि जब खनन दर तय करने की जिम्मेदारी विनियामक आयोग की है, तो पारदर्शी प्रक्रिया क्यों नहीं दिखाई दे रही। इसी बीच अदालत द्वारा दस्तावेज मांगे जाने पर कंपनी की ओर से रिकॉर्ड देने में देरी की बात भी सामने आई।

अब जांच पर टिकी निगाहें

मीटिंग हॉल में आग लगने के बाद जिन दस्तावेजों के नष्ट होने की बात कही जा रही है, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर आयोग के चेयरमैन राजेश कुमार के उस बयान पर है, जिसमें उन्होंने पूरे अग्निकांड की जांच कराने की बात कही थी। सवाल यह है कि जांच कितनी निष्पक्ष होगी और सच्चाई कब सामने आएगी।

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