राजस्थान लैंड स्कैम में CM के कथित साले पर शिकंजा, तीसरा नोटिस तैयार

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Rajasthan News: जयपुर के बहुचर्चित जमीन घोटाले की जांच अब उस मुकाम पर है जहाँ मुख्यमंत्री के कथित साले प्रमोद शर्मा और कानून के बीच का फासला खत्म होने को है। आरोपी का लगातार ‘अंडरग्राउंड’ रहना अब केवल जांच में देरी नहीं, बल्कि गिरफ्तारी का ठोस आधार बन चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक की तमाम रियायतें और नोटिसों की अनदेखी के बाद तीसरा और अंतिम नोटिस जारी किया जाना प्रस्तावित है । (Rajasthan News)संकेत स्पष्ट हैं कि यह नोटिस पेशी के लिए अंतिम अवसर है । इसके बाद पुलिस ‘एक्टिव मोड’ में आकर कुर्की और उद्घोषणा जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई शुरू करेगी।

16 तारीख को नोटिस देकर

ज्ञात हुआ है कि पुलिस आज इस प्रकरण में नोटिस के अलावा कुछ प्रभावी कार्रवाई करने की योजना बना रही थी । लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की यात्रा में व्यस्त रहने की वजह से काल – परसो तक कोई आक्रामक कार्रवाई संभावित है । उधर ​प्रमोद शर्मा के बचाव पक्ष ने इस पूरी कवायद को ‘प्रक्रियात्मक अन्याय’ करार दिया है। उनके वकीलों का तर्क है कि 16 तारीख को नोटिस देकर अगले ही दिन सुबह 9 बजे हाजिर होने का हुक्म देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

बचाव पक्ष इसे अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है, यह तर्क देते हुए कि तैयारी के लिए कम से कम तीन दिन का ‘उचित समय’ मिलना अनिवार्य है। मात्र चंद घंटों की मोहलत को वे पुलिस की दुर्भावना और प्रक्रिया की वैधता पर सवाल के रूप में देख रहे हैं। ​कानूनी दृष्टि से यह मामला अब एक सूक्ष्म मोड़ पर खड़ा है। यद्यपि कानून में ‘तीन दिन’ की कोई लिखित बंदिश नहीं है, लेकिन अदालती नजीरें ‘युक्तिसंगत समय’ की मांग करती हैं। हालांकि, जांच एजेंसी का मानना है कि आरोपी का आचरण और लगातार छिपना इस ‘उचित समय’ के लाभ को समाप्त कर देता है।

प्रमोद शर्मा किसी आश्रम में शरण 

इसी बीच सूत्रों से मिली यह जानकारी कि प्रमोद शर्मा किसी आश्रम में शरण लिए हुए हैं, जांच को नई दिशा दे सकती है। ​उसका बागेश्वर धाम और स्वामी रामभद्राचार्य के साथ फोटो खिंचवाने की खबर खूब वायरल हुई थी । अब दो समानांतर स्थितियां स्पष्ट हैं । एक तरफ पुलिस का कानूनन शिकंजा है, तो दूसरी तरफ बचाव पक्ष की कानूनी ढाल। यदि तीसरे नोटिस के बाद भी प्रमोद शर्मा सामने नहीं आते, तो यह मामला सीधे तौर पर ‘कठोर कार्रवाई बनाम प्रक्रिया की वैधता’ की जंग में बदल जाएगा। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि जांच की आंच सत्ता के इन करीबी रिश्तों तक कितनी तेजी से पहुँचती है।

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