स्काई स्टिंग सिस्टम से बदल सकता है भारत का एयर पावर गेम…PM मोदी के इजराइल दौरे से पहले क्यों बढ़ी चर्चा?

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Sky Sting air defence system

Sky Sting air defence system: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे से पहले भारत और इजराइल के बीच रक्षा सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इन चर्चाओं के केंद्र में है इजराइल की 250 किलोमीटर रेंज वाली नई बीवीआर (Beyond Visual Range) एयर-टू-एयर मिसाइल स्काई स्टिंग.

दरअसल, भारतीय वायुसेना लंबी दूरी की हवाई मारक क्षमता को और मजबूत करना चाहती है. पड़ोसी देश चीन की वायु सेना अपनी Beyond Visual Range क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं. (Sky Sting air defence system) चीन की मदद से पाकिस्तान भी अपनी क्षमताओं में इजाफा कर रहा है, ऐसे में 250 किमी रेंज वाली मिसाइल वायुसेना की लॉन्ग-रेंज एयर डॉमिनेंस क्षमता को बड़ा बढ़ावा दे सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, इस मिसाइल को सबसे पहले HAL द्वारा बनाए जा रहे Tejas Mk1A फाइटर जेट पर लगाने की संभावना है. IAF ने 180 तेजस Mk1A का ऑर्डर दिया है. ये विमान भविष्य में वायुसेना की मध्यम श्रेणी की लड़ाकू ताकत की रीढ़ माने जा रहे हैं. तेजस Mk1A के पहले बैच में इजराइली ELM-2052 AESA रडार लगाया जाना है, जो लंबी दूरी की पहचान, मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता देता है. ऐसे में उसी इकोसिस्टम की मिसाइल के साथ इंटीग्रेशन अपेक्षाकृत आसान हो सकता है.

चरणबद्ध खरीद की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो पहले ऑफ-द-शेल्फ यानी सीधे खरीद का विकल्प अपनाया जा सकता है ताकि तुरंत क्षमता बढ़ाई जा सके. इसके बाद के साथ मिलकर भारत में उत्पादन की संभावना भी देखी जा सकती है. यह कदम मेक इन इंडिया और तकनीकी आत्मनिर्भरता की नीति के अनुरूप होगा.

चुनौतियां क्या हैं?

250 किमी रेंज की मिसाइल को किसी फाइटर जेट पर लगाना आसान काम नहीं है.
मिसाइल का सीकर
डाटा लिंक
इंजन और प्रोपल्शन
विमान का रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम
इन सबके बीच पूरी तकनीकी तालमेल जरूरी होता है.

दरअसल, तेजस Mk1A पर पहले से स्वदेशी मिसाइल के इंटीग्रेशन में भी तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं. ऐसे में रडार और मिसाइल एक ही तकनीकी इकोसिस्टम से हों, तो शुरुआती चरण में सहूलियत मिल सकती है.

अभी विकास चरण में है स्काई स्टिंग

करीब तीन साल पहले पेश की गई स्काई स्टिंग अभी पूरी तरह ऑपरेशनल सेवा में शामिल नहीं हुई है. इसलिए भारत सिर्फ कागज़ी रेंज नहीं देखेगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर माहौल में प्रदर्शन

नो-एस्केप ज़ोन

इंजन की विश्वसनीयता

ट्रायल और वैलिडेशन

इन सभी पहलुओं का गहन परीक्षण करेगा.

भारत इजराइल रक्षा साझेदारी पहले से मजबूत

भारत पहले ही राफेल की I-Derby ER और Python-5 मिसाइलों का उपयोग कर रहा है. इसके अलावा SPYDER एयर डिफेंस सिस्टम और Barak-8 जैसी संयुक्त परियोजनाएं दोनों देशों के गहरे रक्षा सहयोग को दिखाती हैं. ऐसे में स्काई स्टिंग सौदा इस रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार दे सकता है.

अंतिम फैसला क्या होगा?

वायुसेना का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि मिसाइल कितनी जल्दी उपलब्ध हो सकती है क्या इसका प्रदर्शन निवेश के अनुरूप है और क्या यह स्वदेशी प्रयासों के साथ संतुलन बनाकर चल सकती है अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत इस डील को आगे बढ़ा सकता है.

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