Rajya Sabha Elections 2026: देश के पांच राज्यों की 17 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने राजनीतिक गलियारों में सकता मचा दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, मतदान 16 मार्च 2026 को होगा और उसी दिन शाम तक नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा। महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश की इन सीटों पर सत्ता और विपक्ष के बीच कड़ी टक्कर का आसार है। (Rajya Sabha Elections 2026) वर्तमान स्थिति के मुताबिक, इन 17 सीटों में से 9 सीटें एनडीए (NDA) के पास हैं, जबकि 8 सीटें विपक्ष के खाते में हैं। चुनावी गणित के मुताबिक, भाजपा अपनी संख्या बढ़ाने के मिशन पर है, वहीं विपक्ष भी कई राज्यों में एकजुट होकर सत्ता पक्ष को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहा है।
महाराष्ट्र और बिहार में गठबंधनों की अग्निपरीक्षा
इस बार सबसे अधिक नजरें बिहार और महाराष्ट्र पर हैं, जहां गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारा एक बड़ी सियासी चुनौती बनकर उभरा है। बिहार में 5 सीटों के लिए चुनाव होना है, जहां एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। यहां एनडीए की स्थिति मजबूत लग रही है, लेकिन लोजपा, हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे सहयोगी दलों की दावेदारी ने भाजपा के लिए सिरदर्द बढ़ा दिया है।
वहीं, महाराष्ट्र में 7 सीटों पर होने वाले चुनाव में महायुति (भाजपा-शिंदे गुट-एनसीपी) के पास 235 विधायकों का आंकड़ा उसे 6 सीटें आराम से दिला सकता है। हालांकि, सीट बंटवारे को लेकर अड़चन बनी हुई है। शिवसेना (शिंदे गुट) 2 सीटों पर जमा है, जबकि भाजपा 3 सीटें अपने खाते में डालने के साथ ही आरपीआई को भी जगह देना चाहती है। सियासी जानकार मानते हैं कि दोनों ही राज्यों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के खेमों में ‘सेंधमारी’ और ‘क्रॉस वोटिंग’ का खतरा मंडरा रहा है।
हरियाणा और छत्तीसगढ़ में बराबरी का खेल
हरियाणा की 2 सीटों पर मौजूदा समीकरण बराबरी का संकेत दे रहे हैं। यहां एक सीट भाजपा और दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है। वहीं, छत्तीसगढ़ की 2 खाली हो रही सीटों पर सत्ता परिवर्तन के बाद समीकरण बदल गए हैं। यहां भी दोनों पक्षों को एक-एक सीट मिलने की उम्मीद है, जिससे कांग्रेस को एक सीट का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
हिमाचल में कांग्रेस को राहत
हिमाचल प्रदेश की एकमात्र खाली हो रही सीट पर कांग्रेस को राहत की खबर है। विधानसभा में पर्याप्त बहुमत होने की वजह से इस सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन अगर विपक्ष ने बिहार और महाराष्ट्र में छोटे दलों के साथ मिलकर ‘अंडरकरंट’ पैदा किया, तो कुछ सीटों पर खेल पलटने की भी संभावना है।





























































