Pakistan Satellites: भारत के साथ जमीनी तनाव के बीच अब पाकिस्तान ने अंतरिक्ष में अपनी सक्रियता बढ़ाकर नई चुनौती पेश की है। पिछले महज 16 महीनों में पाकिस्तान ने चीन की भारी मदद से 6 अर्थ-ऑब्जर्वेशन (पृथ्वी निगरानी) सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, (Pakistan Satellites)जो सीधे तौर पर भारतीय क्षेत्र और सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
आसमान से भारत पर पैनी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच पाकिस्तान के अंतरिक्ष कार्यक्रम में नाटकीय तेजी आई है। पाकिस्तान ने ‘हाइपरस्पेक्ट्रल’ और रिमोट-सेंसिंग तकनीक से लैस ऐसे सैटेलाइट तैनात किए हैं, जो जमीन पर छिपे हुए सैन्य ठिकानों और हथियारों को आसानी से पहचान सकते हैं। विशेष रूप से, अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया HS-1 सैटेलाइट और अप्रैल 2026 में भेजा गया PRSC-EO3 अत्याधुनिक सेंसर और AI डेटा प्रोसेसिंग से लैस हैं।
पाकिस्तान को भारत की सैन्य तैनाती
इस पूरे मिशन के पीछे चीन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। पाकिस्तान के ये सैटेलाइट न केवल चीनी रॉकेटों के जरिए भेजे गए, बल्कि तकनीक और डेटा साझा करने में भी चीन भरपूर सहयोग कर रहा है। अमेरिकी फर्म COMSPOC के विश्लेषण से पता चला है कि PRSC-EO3 सैटेलाइट को ऐसे ऑर्बिट (कक्षा) में रखा गया है, जो दिन में कई बार जम्मू-कश्मीर और उत्तरी भारत के ऊपर से गुजरता है। इससे पाकिस्तान को भारत की सैन्य तैनाती और बुनियादी ढांचे की हर पल की सटीक जानकारी मिल सकती है।
पाकिस्तान का यह नया सैटेलाइट नेटवर्क
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले दो वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को कुछ रणनीतिक मिशनों में बाधाओं का सामना करना पड़ा है। पूर्व नौसेना अधिकारी एडमिरल सुधीर पिल्लई का कहना है कि पाकिस्तान का यह नया सैटेलाइट नेटवर्क केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि विशेष रूप से सैन्य निगरानी के लिए तैयार किया गया है।
रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो भविष्य के युद्ध अब जमीन के साथ-साथ अंतरिक्ष से मिलने वाली खुफिया जानकारी पर निर्भर करेंगे। चीन और पाकिस्तान की यह जुगलबंदी दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल नजर आ रही है।



































































