हूतियों का बड़ा हमला, सऊदी एयरपोर्ट निशाने पर! ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ा युद्ध का खतरा

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Middle East War

Middle East War: मिडिल ईस्ट में हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी गुटों के बीच बढ़ता टकराव अब नए मोर्चों तक पहुंच चुका है। इसी बीच यमन से आई एक बड़ी खबर ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। (Middle East War)इस हमले के बाद क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं गहरा गई हैं।

हूती विद्रोहियों ने क्या कहा?

अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के लेकर हूती विद्रोहियों ने कहा कि सऊदी अरब द्वारा सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किए हवाई हमलों के जवाब में ये हमले किए गए हैं। वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सारेया ने अपने बयान में कहा है कि सभी एयरलाइंस सऊदी हवाई क्षेत्र से दूर रहे। एयरलाइंस को इस चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सना स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगी पाबंदियां खत्म नहीं हो जातीं। उधर, इस संबंध में यमन सरकार के रक्षा मंत्रालय ने कहा क ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे को निशाना बनाया जा सके।

ट्रंप के शुल्क वाले बयान पर ईरान की आई प्रतिक्रिया

होर्मुज से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20 फीसदी शुल्क लगाने पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर ईरान ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही हैं। जो भी कार्गो शिप्स को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और आसान रास्ता देगा, उसे इस सेवा के लिए शुल्क मिलना चाहिए।’ उन्होंने इसको लेकर आगे कहा, ‘ईरान हमेशा से इस स्ट्रेट का रक्षक रहा है और हमेशा रहेगा। 20 फीसदी शुल्क ज्यादा है, हम उचित शुल्क लेंगे।’

अब तक 15 सीफेरर्स की मौत

संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि ओमान के पास एक तेल टैंकर पर हुए ईरानी हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। घायलों में छह भारतीय नाविक और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पिछले महीने कहा था कि 28 फरवरी से, जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ, तब से होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास हुए हमलों में कम से कम 14 समुद्री कर्मियों (सीफेरर्स) की मौत हो चुकी है। इन आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो अब तक ऐसे हमलों में कुल 15 सीफेरर्स की जान जा चुकी है, जिनमें कई भारतीय नागरिक शामिल हैं।

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