ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, होर्मुज में ऑपरेशन की चर्चा, क्या दुनिया को झेलनी पड़ेगी नई जंग अब

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Middle East Tension

Middle East Tension: अमेरिका को भले ही लाखों डॉलर्स का नुकसान हो जाए. भले ही इस युद्ध में उसके सैनिक मारे जाएं या मिलिट्री विमान ऐसे ही नष्ट होते रहें. हर रोज मीडिया के सामने आने वाले ट्रंप हर बार बयान बदलते हैं और फिर भूल जाते हैं कि उन्होंने पहले क्या कहा था? इस बार भी डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत बड़ी पलटी मारी है. कल ही ट्रंप ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन के लिए सेना नहीं भेज रहे, (Middle East Tension)लेकिन उसके कुछ घंटे बाद ही सबसे बड़ा मिलिट्री मूवमेट शुरू कर दिया. अमेरिका ने पूरी ताकत के साथ अपने सैन्य कदम तेज कर दिए हैं. पिछले कुछ घंटों में अमेरिका की ओर से ईरान की तरफ सबसे बड़ा मिलिट्री मूवमेंट हुआ है. हजारों सैनिक ईरान पर हमले के लिए पहुंच रहे हैं.

 ग्राउंड ऑपरेशन में जरा भी नहीं

कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने कहा था कि वो युद्ध से न तो थकते हैं और न ही बोर होते हैं. ट्रंप ने ये भी कहा था कि वो ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन में जरा भी नहीं हिचकेंगे. ट्रंप से ये भी सवाल किया गया कि ईरान से जमीनी लड़ाई आसान नहीं है. अमेरिका वियतनाम की तरह ईरान युद्ध में फंस सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा कि चाहे ये दूसरा वियतनाम ही क्यों न हो जाए, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति हैं, लेकिन जिस तरह युद्ध का जुनून ट्रंप के सिर पर सवार है. ऐसे में उन्हें उस युद्ध का इतिहास भी याद दिलाना जरूरी है. जब वियतनाम जैसा छोटा देश अमेरिका को घुटनों पर ले आया था.

वियतनाम से नहीं सीखा सबक

अमेरिका ने वियतनाम से कम्युनिज्म खत्म करने के लिए 1955 में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू किया था. अमेरिका को लगा था कि वो वियतनाम को बहुत जल्द हरा देगा, लेकिन वियतनाम में कम्युनिस्ट सरकार के सैनिकों ने जंगलों से गुरिल्ला युद्ध शुरू किया. 1955 से शुरू हुआ ये युद्ध 1975 तक यानी 20 वर्ष तक चला.

रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि इस युद्ध में अमेरिका के 58 हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए. लाखों डॉलर्स का नुकसान हुआ, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप ज़िद पर अड़े हैं. उनकी सेना ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन के लिए निकल पड़ी है.

ईरान की ओर बढ़ रही अमेरिकी फौज

अमेरिका ने बॉक्सर एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 11वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट को रवाना कर दिया गया है. ये जहाज इंडो-पैसिफिक रास्ते से होते हुए पश्चिम एशिया पहुंचेंगे. बॉक्सर एम्फीबियस रेडी ग्रुप में तीन मुख्य जहाज हैं. USS बॉक्सर, ये मुख्य जहाज है यानी असॉल्ट शिप, इससे हमला होगा. बाकी 2 जहाज हैं USS पोर्टलैंड और USS कॉमस्टॉक, ये दोनों ट्रांसपोर्ट डॉक शिप हैं. यानी इन जहाजों से भारी-भरकम हथियार भेजे जा रहे हैं.

इन तीनों जहाजों पर 4 हजार से ज्यादा मरीन्स और सैनिक तैनात हैं. USS बॉक्सर पश्चिम एशिया पहुंचकरUSS त्रिपोली से जुड़ जाएगा. USS त्रिपोली पर पहले से 2200 मरीन्स तैनात हैं, जो कि ईरान की तरफ बढ़ रहा है. इस तरह ईरान के पास कुल अमेरिकी सैनिक और मरीन्स की संख्या 8000 तक हो जाएगी..

कागजी शेर बताते हुए…..

ये सब मिलकर एक ही संदेश दे रहे हैं. अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका तेजी से हमला कर सकता है और ईरान की जमीन पर कब्जा करते हुए ग्राउंड ऑपरेशन चला सकता है. वैसे इस युद्ध के बीच इटली, जर्मनी और फ्रांस ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए मदद की पेशकश की है, लेकिन उन्होंने युद्ध में शामिल न होने और बातचीत का रास्ता अपनाने की शर्त रखी है, लेकिन ट्रंप के दिमाग में सिर्फ युद्ध है और ग्राउंड ऑपरेशन की बात वो पिछले काफी वक्त से कर रहे हैं.

ये तस्वीर जब तेजी से साफ हो रही है कि अमेरिका होर्मुज में ग्राउंड ऑपरेशन कर सकता है. यूरोपीय देश उनका खुलकर युद्ध में उतरने वाला साथ नहीं दे रहे हैं तो अब से कुछ देर पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने नाटो देशों को कायर कह दिया.

नाटो को कागजी शेर बताते हुए भड़क गए और बोले- कायरों अमेरिका तुम्हें याद रखेगा. ट्रंप के इस लेटेस्ट बयान से साफ है कि अमेरिका और नाटो में खाड़ी के युद्ध से बनी दरार अब और चौड़ी होती जा रही है.

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