वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन से हिला विश्व संतुलन, रूस-चीन भड़के, भारत ने अपनाया संतुलन

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Global Politics: वेनेजुएला में शनिवार को हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला केवल लैटिन अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा भू-राजनीतिक संकट बन गया है।

अमेरिका के इस कदम ने वैश्विक समुदाय को साफ तौर पर दो खेमों में बांट दिया है। एक ओर इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बताया जा रहा है,(Global Politics) तो दूसरी ओर कुछ देश इसे लोकतंत्र और स्थिरता की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं।

अमेरिका के खिलाफ खड़ा हुआ बड़ा वैश्विक मोर्चा

अमेरिकी कार्रवाई की सबसे तीखी आलोचना रूस, चीन और ईरान की ओर से देखने को मिली है। इन देशों ने कहा है कि किसी संप्रभु राष्ट्र में सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है और इससे दुनिया में अस्थिरता बढ़ सकती है।

अमेरिका के खिलाफ आवाज उठाने वाले देशों की सूची काफी लंबी है। इसमें रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं।

इन देशों का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे को कमजोर करती है। खास बात यह है कि अमेरिका के भीतर भी ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।

किन देशों ने अमेरिका का खुला समर्थन किया?

दूसरी ओर कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया है। इन देशों का कहना है कि वेनेजुएला में लंबे समय से लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण हो रहा था और अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी हो गया था।

अमेरिका के समर्थन में सामने आए देशों में अर्जेंटीना, इजरायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं। इन देशों का तर्क है कि वेनेजुएला में हालात को सामान्य करने के लिए कड़े कदम जरूरी थे।

भारत ने क्यों अपनाया संतुलित रुख?

इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत ने किसी भी गुट में सीधे खड़े होने से बचते हुए संतुलित और संयमित रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बयान जारी कर कहा कि वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय है।

MEA ने स्पष्ट किया कि भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई को सर्वोपरि मानता है और सभी पक्षों से बातचीत व कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील करता है।

इसके साथ ही भारत ने यह भी बताया कि काराकास स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मेलोनी का दो-टूक लेकिन संतुलित बयान

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेनेजुएला संकट पर अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इटली ने कभी भी मादुरो की चुनावी जीत को मान्यता नहीं दी है और उनकी दमनकारी नीतियों की आलोचना करता रहा है।

हालांकि मेलोनी ने यह भी कहा कि तानाशाही शासन को हटाने के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप सही रास्ता नहीं है। उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि यदि किसी देश की सुरक्षा को ड्रग तस्करी या हाइब्रिड हमलों से खतरा हो, तो आत्मरक्षा के तौर पर कार्रवाई को जायज माना जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया ने तनाव कम करने की अपील की

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया वेनेजुएला में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों को लेकर चिंतित रहा है, लेकिन समाधान का रास्ता बातचीत और कूटनीति से होकर ही जाता है।

अल्बनीज ने दोनों पक्षों से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया वेनेजुएला में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करता रहेगा, जो वहां की जनता की इच्छा को दर्शाता हो।

दुनिया की अगली नजरें वेनेजुएला पर

विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला संकट आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति की दिशा तय कर सकता है। अमेरिका की कार्रवाई ने जहां कुछ देशों को उसके समर्थन में ला खड़ा किया है, वहीं बड़ी संख्या में देश इसे भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल मान रहे हैं।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह टकराव कूटनीतिक बातचीत में बदलेगा या वैश्विक राजनीति में और गहरी दरार पैदा करेगा।

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