बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने हेतु ठोस नीति अपनाए सरकार : आरतिया

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India Economy

India Economy: अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण सभा में बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों तथा भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। सभा में यह निर्णय लिया गया कि भारत सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव-पत्र भेजा जाएगा,(India Economy) जिसका उद्देश्य बदलती विश्व व्यवस्था में भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

सभा में आशीष सराफ, प्रेम बियानी, राजकुमार शर्मा, सीए महेंद्र दानी, हनीफ टांक, संजय शर्मा, नीरज खदरिया, तपेश जैन, रूपसिंह कुमावत, जगननिधि जत्ती, ललित भारद्वाज सहित अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया।

आरतिया के अनुसार वर्तमान समय में वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा संकट, तकनीकी बदलाव तथा वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे परिवर्तन भारत के सामने चुनौतियों के साथ-साथ बड़े अवसर भी लेकर आए हैं। ऐसे समय में भारत सरकार को दूरदर्शी, उद्योग-अनुकूल और भविष्य उन्मुख नीतियाँ अपनाने की आवश्यकता है।

भारत को वैश्विक विनिर्माण

आरतिया ने अपने सुझाव-पत्र में सरकार से आग्रह किया है कि चीन पर वैश्विक निर्भरता कम होने की दिशा में उभर रही संभावनाओं तथा “चाइना प्लस वन स्ट्रेटेजी” का अधिकतम लाभ उठाया जाए। इसके तहत विदेशी निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक क्षेत्रों को सशक्त बनाने तथा भारत को वैश्विक विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) एवं सप्लाई चेन का विश्वसनीय केंद्र बनाने के लिए विशेष नीतियाँ तैयार की जाएँ।

संगठन ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) तथा घरेलू उद्योगों को आसान ऋण, तकनीकी सहयोग और निर्यात प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल अवसंरचना में निवेश बढ़ाने की मांग की गई।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आरतिया ने सौर एवं हरित ऊर्जा परियोजनाओं को गति देने, व्यापारिक कूटनीति को मजबूत करने, संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने तथा भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। इसके अतिरिक्त युवाओं के कौशल विकास, उद्योग आधारित प्रशिक्षण, रोजगारोन्मुख शिक्षा तथा लॉजिस्टिक्स, सड़क, रेल, बंदरगाह एवं औद्योगिक बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया गया।

आरतिया ने सुझाव दिया कि इन विषयों पर केंद्र सरकार राज्य सरकारों को साथ लेकर व्यापक मंथन करे, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी एवं व्यवहारिक नीतियाँ तैयार की जा सकें। संगठन का मानना है कि केंद्र और राज्यों के समन्वय से आर्थिक सुधारों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों

वर्तमान समय में पेट्रोल, डीज़ल एवं रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को उद्योग, व्यापार, परिवहन और आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए आरतिया ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ती अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। संगठन ने सरकार से ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, पेट्रोलियम उत्पादों पर कर संरचना की समीक्षा करने तथा उद्योग एवं परिवहन क्षेत्र को राहत देने हेतु दीर्घकालिक ऊर्जा नीति बनाने का आग्रह किया, जिससे महंगाई नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

आरतिया का मानना है कि यदि भारत सरकार समय रहते व्यापार समर्थक, आत्मनिर्भरता आधारित और भविष्य उन्मुख नीतियाँ अपनाती है, तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। अंत में आरतिया ने भारत सरकार से आग्रह किया कि व्यापार, उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए।

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