12 घंटे में बयान, तीन दिन में मेडिकल रिपोर्ट… क्या सामने आएगी सच्चाई?

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Udaipur News: जोधपुर/उदयपुर। पुलिस हिरासत में 18 वर्षीय युवक के साथ कथित अमानवीय व्यवहार के आरोपों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने प्रथम दृष्टया आरोपों को चिंताजनक बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।

अदालत ने साफ कहा है कि जांच किसी भी स्थिति में RPS रैंक से कम (Udaipur News)अधिकारी को नहीं सौंपी जाएगी और सलूंबर के पुलिस अधीक्षक स्वयं इसकी निगरानी करेंगे।

हाईकोर्ट ने उदयपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए हैं कि 12 घंटे के भीतर पीड़ित युवक का बयान दर्ज किया जाए। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बयान पूरी तरह स्वतंत्र वातावरण में लिया जाए और युवक पर किसी प्रकार का दबाव न हो।

साथ ही संबंधित पुलिस निरीक्षक को मामले की आगे की कार्यवाही से दूर रखने का आदेश दिया गया है, ताकि जांच प्रभावित न हो।

क्या है आरोप?

युवक की बहन की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिरासत के दौरान युवक के साथ मारपीट की गई और उसे अपमानजनक तथा अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा।

अदालत ने टिप्पणी की कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल कानूनी उल्लंघन होगा बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों और मानव गरिमा के सिद्धांतों का भी गंभीर हनन होगा।

मेडिकल बोर्ड गठित, तीन दिन में रिपोर्ट

कोर्ट ने आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, उदयपुर को तीन वरिष्ठ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है। यह बोर्ड तीन दिन के भीतर विस्तृत चिकित्सीय रिपोर्ट पेश करेगा।

इसके अलावा, संबंधित थाने और आसपास के क्षेत्रों की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि साक्ष्य से कोई छेड़छाड़ न हो सके।

अगली सुनवाई 24 फरवरी को

मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित की गई है। इस दिन अदालत के समक्ष जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

कानूनी और सामाजिक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में न्यायालय का यह कड़ा रुख पुलिस जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हिरासत में किसी भी प्रकार की अमानवीयता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब सबकी नजर 24 फरवरी की सुनवाई पर है, जहां यह साफ होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है और अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।

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