CAA पर सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक सुनवाई 5 मई से: 7 दिन में पूरी होगी बहस, असम-त्रिपुरा के मामले अलग

5
CAA

CAA: नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर देश की राजनीति और कानूनी बहस एक बार फिर तेज होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने CAA 2019 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर दी है। शीर्ष अदालत 5 मई से लगातार सुनवाई शुरू करेगी और तय समयसीमा में बहस पूरी करने का संकेत दिया है।

जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया है(CAA) कि सभी पक्षों को पूरा अवसर दिया जाएगा और सुनवाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

CAA 2019 को लेकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) सहित 250 से अधिक याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाओं में कानून को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण बताया गया है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून धार्मिक आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि यह प्रावधान एक विशेष धार्मिक वर्ग को बाहर रखता है और समानता के मूल ढांचे के खिलाफ है।

वहीं, केंद्र सरकार पहले भी अदालत में कह चुकी है कि यह कानून पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यकों को राहत देने के उद्देश्य से लाया गया है।

यहां पढ़ें पूरा सुनवाई शेड्यूल

5 मई: याचिकाकर्ताओं की दलीलें शुरू होंगी।
6 मई (पहला आधा दिन): याचिकाकर्ताओं की बहस जारी रहेगी।
6 मई (दूसरा आधा दिन) और 7 मई: केंद्र सरकार अपना पक्ष रखेगी।
12 मई: जरूरत पड़ने पर याचिकाकर्ताओं को जवाब देने का अवसर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखना चाहता और सुनवाई को तय समय के भीतर पूरा किया जाएगा।

असम और त्रिपुरा पर अलग से सुनवाई क्यों?

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि असम और त्रिपुरा से जुड़े मुद्दे अलग प्रकृति के हैं, इसलिए इन मामलों की सुनवाई मुख्य याचिकाओं के बाद अलग से की जाएगी। अदालत का मानना है कि इन राज्यों की ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से भिन्न हैं, इसलिए विशेष विचार जरूरी है।

राजनीतिक और कानूनी नजरिया

CAA पर सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जा रही है। यह मामला संविधान के मूल ढांचे, समानता के अधिकार और नागरिकता की परिभाषा जैसे गंभीर प्रश्नों से जुड़ा हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अदालत में होने वाली बहस देश की संवैधानिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों की दिशा तय कर सकती है। अब सबकी निगाहें 5 मई पर टिकी हैं, जब इस बहुप्रतीक्षित मामले की अंतिम सुनवाई शुरू होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here