असम में पीएम मोदी की ऐतिहासिक लैंडिंग, चीन सीमा को बड़ा संदेश

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Dibrugarh Moran ELF

Dibrugarh Moran ELF: नई दिल्ली/असम। प्रधानमंत्री  ने शुक्रवार को असम दौरे के दौरान डिब्रूगढ़-मोरान इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उतरकर एक रणनीतिक सकेत दिया। किसी भी प्रधानमंत्री का यह पहली बार इस हाईवे-आधारित एयरस्ट्रिप पर उतरना है। इसे चीन(Dibrugarh Moran ELF)सीमा के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

चीन फैक्टर से जुड़ी रणनीतिक अहमियत

यह ELF ऐसे समय में चर्चा में है जब (LAC) पर संवेदनशीलता बनी रहती है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारत की दक्षिण-पूर्वी दिशा अपेक्षाकृत संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में हाईवे पर विकसित यह इमरजेंसी एयरस्ट्रिप वायुसेना को वैकल्पिक ऑपरेशनल क्षमता देती है।

भारतीय वायुसेना के प्रमुख बेस जैसे हाशिमारा (जहां राफेल स्क्वाड्रन तैनात है), तेजपुर, जोरहाट और चाबुआ पहले से सक्रिय हैं। लेकिन युद्ध जैसी स्थिति में पारंपरिक एयरबेस दुश्मन के निशाने पर आ सकते हैं। ऐसे में ELF जैसे विकल्प सामरिक लचीलापन बढ़ाते हैं।

क्या है ELF और कैसे करेगा काम?

इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ने पर : के फ्रंटलाइन फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट यहां उतर सकें।

इस्तेमाल से पहले संबंधित हाईवे को ट्रैफिक के लिए पूरी तरह सील कर दिया जाएगा। सुरक्षाबल इलाके को सुरक्षित करेंगे और फिर एयरक्राफ्ट की लैंडिंग, रिफ्यूलिंग और री-आर्मिंग की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकेगी। जमीन पर खड़े फाइटर जेट हमले के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए ऐसे वैकल्पिक रनवे रणनीतिक रूप से अहम हैं।

सिर्फ युद्ध नहीं, आपदा में भी उपयोगी

यह सुविधा केवल सैन्य जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव अभियानों में भी उपयोगी साबित हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं की आशंका को देखते हुए यह एयरस्ट्रिप मानवीय सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ऐतिहासिक लैंडिंग

प्रधानमंत्री मोदी सुबह विमान में सवार होकर चाबुआ एयरफील्ड से उड़े और मोरान स्थित ELF पर उतरे। यह नॉर्थ-ईस्ट की पहली ऐसी सुविधा है जहां किसी प्रधानमंत्री ने औपचारिक रूप से लैंडिंग की।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में भारत की सामरिक तैयारियों और बुनियादी ढांचे की मजबूती का सार्वजनिक प्रदर्शन भी है।

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