टैक्स नहीं, अब मशीनें बोलेंगी, पान मसाला उद्योग पर सरकार की नई रणनीति ने सबको चौंका दिया

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Public Health Fund

Public Health Fund: नई दिल्ली। सरकार ने पान मसाला उद्योग पर शिकंजा कसते हुए टैक्स वसूली का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। अब कंपनियों से टैक्स उनकी बिक्री के अनुमान पर नहीं, बल्कि उत्पादन क्षमता और मशीनों की संख्या के आधार पर वसूला जाएगा। इस बदलाव के बाद पान मसाला पर कुल टैक्स बोझ 88 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बना रहेगा।

सरकारी आकलन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में इस नई व्यवस्था से करीब 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जा सकता है, जबकि चालू वित्त वर्ष के आखिरी दो महीनों में ही 2,330 करोड़ रुपये खजाने में आने का अनुमान है।


मशीन से टैक्स तय

नए नियमों के तहत पान मसाला कंपनियों को यह बताना अनिवार्य होगा कि उनके पास कितनी मशीनें हैं और प्रत्येक मशीन की उत्पादन क्षमता कितनी है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर टैक्स तय होगा। सरकार का मानना है कि इससे अंडर-रिपोर्टिंग और टैक्स चोरी पर रोक लगेगी।

यह व्यवस्था दिसंबर 2025 में संसद की मंजूरी के बाद लागू की गई थी, जिसे अब पूरी तरह अमल में लाया जा रहा है।


सेहत और सुरक्षा के लिए बनेगा ‘स्पेशल फंड’

वित्त मंत्री ने साफ किया है कि पान मसाला पर लगाए गए इस नए सेस से मिलने वाली रकम सिर्फ राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी। इससे एक ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर फंड’ बनाया जाएगा।

इस फंड का इस्तेमाल—

  • राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं
  • राज्यों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों

जैसे कामों में किया जाएगा। राज्यों को भी इसमें हिस्सेदारी मिलेगी, ताकि योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंच सकें।


मुआवजा उपकर का दौर खत्म, अब राष्ट्र निर्माण पर फोकस

GST परिषद ने सितंबर 2025 में यह फैसला लिया था कि राज्यों को नुकसान की भरपाई के लिए लिया गया पुराना कर्ज 31 जनवरी 2026 तक चुका दिया जाएगा। करीब 2.69 लाख करोड़ रुपये का यह कर्ज अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

इसके साथ ही पुराने ‘मुआवजा उपकर’ की जगह अब यह नया ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर’ लागू कर दिया गया है। यानी अब टैक्स का पैसा घाटा भरने के बजाय सीधे जनहित और रक्षा जरूरतों में लगेगा।


सख्त निगरानी में पान मसाला उद्योग

सरकार का मानना है कि यह नया मॉडल तंबाकू और पान मसाला जैसे ‘सिन गुड्स’ पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा। एक्साइज ड्यूटी के साथ मिलकर यह सिस्टम उत्पादन से लेकर टैक्स तक हर स्तर पर पारदर्शिता लाएगा।

कुल मिलाकर, पान मसाला उद्योग के लिए यह बदलाव सिर्फ टैक्स का मामला नहीं, बल्कि निगरानी, जवाबदेही और सामाजिक जिम्मेदारी का नया अध्याय माना जा रहा है।

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