विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में हुई कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में 11 फरवरी तक सदन का कामकाज तय किया गया। BAC की बैठक में हुए फैसले के मुताबिक 11 फरवरी को बजट पेश होगा।राजस्थान में OMR शीट घोटाले को लेकर राजनीति लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच बुधवार (28 जनवरी) को मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के बयान ने सियासत को और गर्मा दिया।
मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने स्वीकार किया कि साल 2018 में OMR मार्कशीट के साथ छेड़छाड़ हुई थी। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उस समय सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने सिस्टम का दुरुपयोग किया। राठौड़ के इस बयान के बाद कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भजनलाल सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
10-12 साल की CBI जांच कराओ
राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने परीक्षा पेपर लीक और OMR शीट गड़बड़ी को लेकर भजनलाल सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है, तो पिछले 10-12 वर्षों की सभी परीक्षाओं की CBI जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
दोषी कोई भी हो, कार्रवाई समान हो
डोटासरा ने साफ कहा कि कार्रवाई केवल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं होनी चाहिए। चाहे दोषी भाजपा शासनकाल के हों या कांग्रेस शासनकाल के, सभी के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत को लेकर इस तरह की भाषा का प्रयोग करना शोभा नहीं देता कि जांच उनके घर तक आएगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार सिर्फ बयानबाज़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि मगरमच्छ पकड़ने जैसे बयान दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
डोटासरा ने यह भी कहा कि बाबूलाल कटारा कांग्रेस शासनकाल में बनाए गए थे और उन्हें जेल भी कांग्रेस सरकार ने ही भेजा था।
बजरी खनन के आरोपों पर भी उठाए सवाल
गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि अगर वे सच में कार्रवाई करना चाहते हैं, तो किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगाए गए रोज़ाना 8 करोड़ रुपये के अवैध बजरी खनन के आरोपों पर ठोस कदम उठाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। OMR शीट घोटाले को लेकर बढ़ती यह सियासत आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति को और गरमा सकती है।



































































