Indian Judiciary: नई दिल्ली। पिछले दस वर्षों में उच्च न्यायपालिका के जजों के खिलाफ कुल 8,630 शिकायतें दर्ज होने का खुलासा लोकसभा में हुआ है। सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद माथेस्वरन वी एस ने सरकार से पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के पास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार, यौन दुराचार या (Indian Judiciary)अन्य गंभीर आरोपों से जुड़ी शिकायतों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड या डेटाबेस मौजूद है।
सरकार का जवाब
कानून एवं न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि उच्च न्यायपालिका के खिलाफ शिकायतों का निपटारा न्यायपालिका के “इन-हाउस मैकेनिज्म” के तहत किया जाता है।
उन्होंने बताया कि 7 मई 1997 को सुप्रीम कोर्ट ने दो अहम संकल्प अपनाए थे— Restatement of Values of Judicial Life और In-house Procedure। इन्हीं के आधार पर शिकायतों की सुनवाई की प्रक्रिया तय है।
किस वर्ष कितनी शिकायतें?
- 2016 — 72
- 2017 — 682
- 2018 — 717
- 2019 — 1,037
- 2020 — 518
- 2021 — 686
- 2022 — 1,012
- 2023 — 977
- 2024 — 1,170
- 2025 — 1,102
सरकार के अनुसार, 2016 से 2025 के बीच मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को कुल 8,630 शिकायतें प्राप्त हुईं।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के जजों और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतें सीधे मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास जाती हैं। वहीं, हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतें संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजी जाती हैं।
CPGRAMS या अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतें भी संबंधित प्राधिकरण को अग्रेषित की जाती हैं।
क्या बढ़ेगी पारदर्शिता पर चर्चा?
सरकार ने यह भी दोहराया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान में निहित है और शिकायतों के निपटान की प्रक्रिया न्यायपालिका के भीतर तय तंत्र के अनुसार चलती है।
हालांकि, लोकसभा में सामने आए आंकड़ों के बाद उच्च न्यायपालिका की जवाबदेही, पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

































































