Trade War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी है। सोमवार, 5 जनवरी 2026 को ट्रंप ने कहा कि अगर भारत इस मामले में अमेरिका का सहयोग नहीं करता है, तो उस पर टैक्स और बढ़ाया जा सकता है। (Trade War)व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक ऑडियो क्लिप में ट्रंप यह कहते सुने गए कि अमेरिका भारत पर “बहुत जल्दी” टैक्स बढ़ा सकता है।
PM मोदी को लेकर क्या बोले ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत सराहना करते हुए कहा कि वे “बहुत अच्छे इंसान” हैं और अमेरिका को खुश करने की कोशिश करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं था और उन्हें यह जरूरी लगा कि वे मुझे खुश करें। वे व्यापार करते हैं, लेकिन हम उन पर बहुत तेजी से टैक्स बढ़ा सकते हैं।”
भारत पर पहले ही लग चुका है 50% टैरिफ
गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू कर चुका है। इसमें 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनाल्टी उस वजह से जोड़ी गई थी, क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। ट्रंप के मुताबिक, पहले भारत पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाया गया, फिर 7 अगस्त को इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया और साल के अंत तक यह 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ा सीधा असर
इस टैरिफ युद्ध का असर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के दिसंबर 2025 के विश्लेषण के अनुसार, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को निर्यात 37.5 प्रतिशत घट गया। यह आंकड़ा 8.8 अरब डॉलर से गिरकर 5.5 अरब डॉलर रह गया।
लंबे समय से भारत पर दबाव बना रहा है अमेरिका
डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन बीते एक साल से लगातार भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर दबाव बना रहा है। यही वजह है कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब तक अटका हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की ताजा धमकी से दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में नया तनाव पैदा हो सकता है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल?
भारत के लिए रूस एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता होता है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती हैं और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। यही कारण है कि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वह अपने आर्थिक हितों के आधार पर ऊर्जा आयात का फैसला करेगा।
यूक्रेन युद्ध और ट्रंप की बढ़ती नाराजगी
अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में कर रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म करने का दावा किया था, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी है। विश्लेषकों का मानना है कि इसी नाकामी की झुंझलाहट ट्रंप के बयानों में झलक रही है, जिसका दबाव भारत जैसे देशों पर डाला जा रहा है।
हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा।






























































