World Politics: अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली हाई-वोल्टेज बैठक से पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का कनाडा पहुंचना महज एक ट्रांजिट स्टॉप नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नाटो और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर जेलेंस्की ने यह साफ संकेत दे दिया कि ट्रंप के साथ होने वाली मुलाकात ( World Politics)औपचारिकता नहीं, बल्कि यूक्रेन युद्ध के भविष्य से जुड़े बड़े फैसलों की जमीन तैयार करने वाली है।
रूस के खिलाफ सख्त रुख की अपील
वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान जेलेंस्की ने वैश्विक नेताओं से अपील की कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के “वास्तविक और न्यायपूर्ण अंत” से बचने या उसमें हेरफेर करने का मौका नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूत और एकजुट रुख जरूरी है।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को अब भी अंतरराष्ट्रीय समर्थन की सख्त जरूरत है और यह समर्थन जितना संगठित और स्पष्ट होगा, उतना ही युद्ध को सही दिशा में ले जाने में मदद मिलेगी।
सोशल मीडिया पर भी दिया स्पष्ट संदेश
बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जेलेंस्की ने लिखा, “पुतिन को युद्ध के वास्तविक और न्यायसंगत अंत से बचने और उसमें हेरफेर करने से रोकने के लिए मोर्चे पर और कूटनीति—दोनों जगह मजबूत रुख अपनाने की जरूरत है। दुनिया के पास सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने की पर्याप्त ताकत है।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस चर्चा में यूक्रेन के मौजूदा राजनयिक प्रयासों और आगे की प्राथमिकताओं पर गहराई से विचार किया गया।
ट्रंप से मुलाकात के बाद भी संवाद जारी रहेगा
जेलेंस्की ने साफ किया कि यह संवाद यहीं खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हमने राजनयिक मोर्चे पर हुई प्रगति और सबसे अहम प्राथमिकताओं पर चर्चा की है। यूक्रेन को हर तरह के समर्थन की सराहना है। ट्रंप के साथ होने वाली बैठक के बाद भी यह बातचीत जारी रहेगी।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेलेंस्की ट्रंप से मुलाकात से पहले पश्चिमी देशों को एक साझा मंच पर लाकर अपना पक्ष और मजबूत करना चाहते हैं, ताकि किसी भी संभावित नीति बदलाव का असर यूक्रेन के खिलाफ न जाए।
इन दिग्गज नेताओं ने लिया हिस्सा
इस अहम वीडियो कॉन्फ्रेंस में यूरोप और नाटो के कई बड़े नेता शामिल रहे। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक शूफ़, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन शामिल थे।
इसके अलावा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, नाटो महासचिव मार्क रुट्टे और ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल भी इस चर्चा का हिस्सा बने। कुल मिलाकर, ट्रंप से होने वाली बैठक से पहले जेलेंस्की का यह कूटनीतिक सक्रियता दिखाती है कि यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के हर मंच पर निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।































































