वार्ता फेल तो ‘प्लान B’! United States की नई रणनीति, Musa Island बना निशाना

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Iran News

Iran News: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब उस खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां से वापसी का रास्ता केवल ‘संधि’ है. अमेरिका ने कूटनीतिक बातचीत के लिए 15 दिनों का समय दिया है, लेकिन पर्दे के पीछे ‘प्लान-बी’ पर काम शुरू हो चुका है.

अगर वार्ता विफल रही तो खाड़ी देशों के मुहाने पर स्थित अबू मूसा द्वीप पर एक भीषण जंग छिड़ सकती है. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने अपना मुख्य निशाना तय कर लिया है. (Iran News)अबू मूसा द्वीप ईरान और यूएई से महज 40 मील दूर, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है. इस द्वीप पर जिसका कब्जा होगा, वह इस रास्ते से गुजरने वाले दुनिया के हर जहाज और नाव को नियंत्रित कर सकेगा. अमेरिका की नजर अबू मूसा के साथ-साथ ‘छोटा तुनब’ और ‘बड़ा तुनब’ द्वीपों पर भी है.

समंदर में बढ़ती घेराबंदी

पिछले एक महीने से ईरान ने इसी द्वीप का इस्तेमाल करके अपनी तेज रफ्तार स्पीडबोट्स और ड्रोन्स के जरिए जहाजों पर हमले किए हैं. जवाब में, अमेरिका ने अपनी ताकत झोंक दी है. USS Tripoli जहाज 2200 मरीन के साथ फिलहाल Iran की तरफ बढ़ रहा है. 82वीं एयरबोर्न डिवीजन तैनाती के लिए रवाना हो चुकी है. अपाचे हेलीकॉप्टर ईरानी तटों के पास लगातार मंडरा रहे हैं.

10 लाख से अधिक लड़ाकों को अलर्ट मोड

दूसरी ओर, ईरान झुकने को तैयार नहीं है. ईरान की तास्नीम न्यूज के अनुसार, उन्होंने अमेरिका के खिलाफ जमीनी लड़ाई के लिए 10 लाख से अधिक लड़ाकों को अलर्ट मोड पर रखा है. इसमें उनकी खतरनाक ‘बसीज मिलिशिया’ भी शामिल है. ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी खाड़ी देश ने अमेरिका को जमीन या ऑपरेशन के लिए समर्थन दिया, तो वह ‘अभूतपूर्व’ कार्रवाई करेगा. दुनिया की नजरें अब उन 15 दिनों पर टिकी हैं जो अमेरिका ने संधि के लिए दिए हैं. यह समय तय करेगा कि विवाद बातचीत की मेज पर सुलझेगा या फिर अबू मूसा द्वीप एक विनाशकारी युद्ध का गवाह बनेगा.

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