US Trade Probe: भारत, चीन और EU के खिलाफ नई जांच, कारोबार पर क्या होगा असर?

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US Trade Probe

US Trade Probe:दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बार फिर हलचल मच गई है। अमेरिका ने भारत, चीन और यूरोपीय यूनियन (EU) जैसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ गलत ट्रेड प्रैक्टिस (Unfair Trade Practices) की नई जांच शुरू कर दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस जांच के बाद भारतीय एक्सपोर्ट पर नए टैरिफ लग सकते हैं और क्या इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर पड़ेगा? यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी को लेकर अदालत में भी विवाद चल रहा था। (US Trade Probe)अब नई जांच के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या भारतीय एक्सपोर्ट पर बढ़ सकता है टैरिफ का दबाव?

अगर जांच में किसी देश की ट्रेड प्रैक्टिस गलत पाई जाती है तो अमेरिका उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी भारतीय सामानों पर करीब 10% टैरिफ लागू है, जिसे बढ़ाकर 15% तक किया जा सकता है। इसका असर खास तौर पर दो बड़े सेक्टर पर पड़ सकता है:

फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग) टेक्सटाइल और गारमेंट्स ये दोनों सेक्टर भारत के लिए बड़े एक्सपोर्ट सेक्टर हैं। अगर टैरिफ बढ़ता है तो भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।

क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पड़ सकता है असर?

भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम ट्रेड डील पर बातचीत चल रही थी, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद इस पर अनिश्चितता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते को लेकर होने वाली एक अहम बैठक भी फिलहाल टाल दी गई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ट्रेड डील अभी खत्म नहीं हुई है और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी।

अमेरिका और किन देशों की जांच कर रहा है?

अमेरिका की इस नई जांच में भारत के अलावा कई अन्य देशों को भी शामिल किया गया है। इनमें ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर कनाडा इस जांच के दायरे में नहीं है।

क्या यह कदम नए ग्लोबल ट्रेड वॉर की शुरुआत है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने बड़े पैमाने पर नए टैरिफ लगाए तो यह वैश्विक व्यापार में एक नई प्रतिस्पर्धा और तनाव पैदा कर सकता है। इससे सप्लाई चेन और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट पर भी असर पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसका मकसद अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाना और ट्रेड डेफिसिट कम करना है। इसके लिए उनके पास कई कानूनी और आर्थिक उपाय मौजूद हैं।

आगे क्या हो सकता है?

अमेरिका ने इस जांच के लिए एक तेज़ टाइमलाइन तय की है। 15 अप्रैल तक पब्लिक कमेंट्स लिए जाएंगे 5 मई को पब्लिक हियरिंग हो सकती है…इसके बाद ही यह साफ होगा कि किन देशों पर नए टैरिफ लगाए जाएंगे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका की इस जांच से भारत के एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ेगा, या दोनों देशों के बीच कोई नया समझौता हो जाएगा? आने वाले कुछ महीनों में इसका जवाब सामने आ सकता है, लेकिन इतना तय है कि वैश्विक व्यापार की राजनीति एक बार फिर गर्म होती दिख रही है।

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