आज से बिना एक्टिव सिम नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram, सरकार का बड़ा डिजिटल फैसला

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DoT SIM Binding rule

DoT SIM Binding rule: नई दिल्ली। ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी अकाउंट्स पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बड़ा डिजिटल कदम उठा दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) का नया ‘SIM Binding’ नियम अब पूरी तरह लागू हो चुका है। इसके बाद WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स अब केवल OTP से नहीं, बल्कि लगातार एक्टिव सिम वेरिफिकेशन के साथ ही चल (DoT SIM Binding rule)पाएंगे।

28 फरवरी की समय सीमा खत्म होने के बाद अब सभी टेलीकॉम कंपनियों और ऐप प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

क्या बदला? अब सिर्फ OTP से काम नहीं चलेगा

अब तक यूजर एक बार OTP के जरिए अकाउंट वेरिफाई करके सिम निकाल देते थे और महीनों तक Wi-Fi पर ऐप चलाते रहते थे। लेकिन नए नियम के बाद यह संभव नहीं होगा।

लाइव सिम वेरिफिकेशन: ऐप्स लगातार जांच करेंगे कि रजिस्टर्ड सिम फोन के प्राइमरी स्लॉट में एक्टिव है या नहीं।
सिम हटते ही लॉगआउट: अगर सिम निकाला या बंद हुआ, तो WhatsApp या Telegram अकाउंट स्वतः डिसेबल या लॉग-आउट हो जाएगा।

री-वेरिफिकेशन जरूरी: दोबारा इस्तेमाल के लिए उसी सिम से फिर वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होगा। WhatsApp Web यूजर्स पर सबसे ज्यादा असर इस नियम का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो WhatsApp Web या डेस्कटॉप वर्जन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

हर 6 घंटे में लिंक किए गए डिवाइस ऑटो लॉग-आउट हो सकते हैं। दोबारा लॉगिन के लिए एक्टिव सिम वाले फोन से QR कोड स्कैन करना जरूरी होगा। ‘Linked Devices’ फीचर अब बैकग्राउंड में लगातार सिम एक्टिविटी चेक करेगा।
सरकार का मकसद क्या है? सरकार का कहना है कि साइबर क्राइम, फर्जी कॉलिंग, OTP फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। अपराधी अक्सर एक बार वेरिफाई करके सिम निकाल देते थे और इंटरनेट के जरिए अकाउंट चलाते रहते थे। नए नियम से ऐसे फर्जी या अस्थायी अकाउंट्स पर रोक लगेगी और ट्रेसबिलिटी बेहतर होगी।

क्या आम यूजर को परेशानी होगी?

टेक विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन यूजर्स का सिम नियमित रूप से फोन में लगा रहता है, उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। लेकिन…डुअल सिम यूजर्स को प्राइमरी स्लॉट का ध्यान रखना होगा। विदेश यात्रा पर Wi-Fi से ऐप चलाने वालों को बार-बार वेरिफिकेशन करना पड़ सकता है। लंबे समय तक सिम बंद रखने वालों का अकाउंट ऑटो-डिसेबल हो सकता है।
डिजिटल सिक्योरिटी बनाम यूजर सुविधा

‘SIM Binding’ नियम को सरकार डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। हालांकि कुछ यूजर्स इसे निजता और सुविधा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।

आने वाले दिनों में साफ होगा कि यह नियम साइबर फ्रॉड पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाता है और आम यूजर्स के अनुभव पर इसका कितना असर पड़ता है। फिलहाल इतना तय है—अब बिना एक्टिव सिम के आपका मैसेजिंग अकाउंट सुरक्षित नहीं, बल्कि निष्क्रिय हो सकता है।

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