RERA Order: राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि घर खरीदारों के साथ की जाने वाली लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जयपुर के चर्चित हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘मोजिका अल्टीमा’ में देरी के मामले में रेरा ने ऐसा फैसला दिया है, (RERA Order)जिसने हजारों खरीदारों को राहत और भरोसा दिया है।
एक फ्लैट, कई साल की इंतजार और उम्मीद
शिकायतकर्ता जगराम सिंह मीणा ने सांगानेर स्थित ‘मोजिका अल्टीमा’ प्रोजेक्ट में फ्लैट नंबर 403 (ब्लॉक-बी) बुक किया था। जून 2016 में हुए एग्रीमेंट के अनुसार, उन्हें तय समय पर अपना घर मिल जाना चाहिए था। रेरा रजिस्ट्रेशन के मुताबिक प्रोजेक्ट की पूर्णता तिथि 2 जनवरी 2021 तय की गई थी, लेकिन हकीकत में फ्लैट की रजिस्ट्री मार्च 2022 में जाकर हुई।
जब इंतजार बोझ बन जाए
घर का सपना लिए खरीदार हर महीने EMI भी देता रहा और किराया भी। देरी से परेशान होकर आखिरकार उसने रेरा का दरवाजा खटखटाया और उस अवधि का ब्याज मांगा, जब उसे अपने ही घर के लिए इंतजार करना पड़ा।
कोविड बहाना नहीं, जिम्मेदारी से बचने का रास्ता नहीं
सुनवाई के दौरान बिल्डर मोजिका रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने कोविड-19 को ‘फोर्स मेज्योर’ बताते हुए देरी को सही ठहराने की कोशिश की। लेकिन रेरा सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि कोविड राहत अवधि के बावजूद प्रमोटर पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
RERA का स्पष्ट और सख्त आदेश
रेरा ने अपने आदेश में कहा कि प्रमोटर को 31 जनवरी 2021 से 24 मार्च 2022 (वास्तविक पजेशन तिथि) तक की अवधि के लिए खरीदार को 10.80% वार्षिक ब्याज देना होगा। अथॉरिटी ने इस राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला सिर्फ एक खरीदार को राहत देने तक सीमित नहीं है। यह उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद है, जो वर्षों से अपने घर के इंतजार में हैं। रेरा का यह आदेश साफ संदेश देता है कि घर खरीदार केवल ग्राहक नहीं, बल्कि कानून से संरक्षित नागरिक हैं। कुल मिलाकर, यह फैसला उन बिल्डरों के लिए चेतावनी है जो देरी को सामान्य प्रक्रिया समझते हैं, और उन खरीदारों के लिए हौसला, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से डरते हैं।































































