Rajasthan politics: जयपुर। राजस्थान की राजनीति में धर्म और जनसंख्या का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। पुष्कर की कथा में धीरेंद्र शास्त्री द्वारा हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने की अपील के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे “राजनीतिक एजेंडा” बताते हुए कड़ा पलटवार किया है।
डोटासरा ने कहा कि यह बयान सिर्फ धार्मिक नहीं, (Rajasthan politics) बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अगर चार बच्चों की सलाह देनी है तो पहले मोहन भागवत को दीजिए।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक मंचों से जनसंख्या नीति तय होगी?
“बीजेपी की डबल पॉलिसी” का आरोप
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के दौर में लागू उस प्रावधान का हवाला दिया, जिसमें दो से अधिक बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक थी। डोटासरा ने कहा कि एक तरफ जनसंख्या नियंत्रण की नीति और दूसरी ओर चार बच्चों की अपील—यह विरोधाभास क्यों?
डोटासरा ने कहा कि जनसंख्या नीति जैसे विषय संसद और नीति आयोग में तय होते हैं, न कि धार्मिक मंचों से। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत करने की कोशिश की जा रही है।
चुनावी पिच पर नया मुद्दा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस इसे सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी खेमे में इसे “सांस्कृतिक विमर्श” बताया जा सकता है।
डोटासरा ने धीरेंद्र शास्त्री को भाजपा की ‘बी-टीम’ बताते हुए कहा कि धार्मिक हस्तियों को राजनीतिक मंच नहीं बनना चाहिए। हालांकि भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
प्रदेश की सियासत में गर्माहट
इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में नई लाइन खिंचती दिख रही है—एक ओर धार्मिक पहचान की राजनीति, दूसरी ओर जनसंख्या नियंत्रण और नीति की बहस। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर चुनावी मंचों तक गूंज सकता है।





























































