राजस्थान में चुनावी शंखनाद! BJP ने उतारे दिग्गज, कांग्रेस भी अगस्त से मिशन मोड में

Local Body Elections: जयपुर। राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनावों की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, लेकिन सियासी दलों ने चुनावी मोर्चा संभाल लिया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति के तहत सातों संभागों में चुनाव संचालन समितियों का गठन कर चुनावी तैयारियों का आगाज कर दिया है। (Local Body Elections) वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेशभर में बैठकों और जनसंवाद अभियान के जरिए चुनावी माहौल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दोनों दलों की सक्रियता से साफ है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव इस बार केवल स्थानीय सत्ता का नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल भी माने जा रहे हैं।

सात संभागों में भाजपा ने सौंपी रणनीतिक जिम्मेदारी

भाजपा ने प्रत्येक संभाग में तीन-तीन वरिष्ठ नेताओं को चुनाव संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। समितियों में सांसद, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और संगठन के अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर संगठन, चुनाव प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

संभागवार प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं:

  • जयपुर: घनश्याम तिवाड़ी, प्रभुलाल सैनी, लालचंद कटारिया
  • जोधपुर: ओंकार सिंह लखावत, सी.आर. चौधरी, हेमराज मीणा
  • भरतपुर: अरुण चतुर्वेदी, हरीराम रिणवा, शंकर सिंह राजपुरोहित
  • कोटा: सी.पी. जोशी, अर्जुनलाल मीणा, अजीत मेहता
  • अजमेर: अशोक परनामी, ज्योति मिर्धा, देवजी पटेल
  • उदयपुर: राजेन्द्र राठौड़, नारायण पंचारिया, जसकौर मीणा
  • बीकानेर: मुकेश दाधीच, जसवंत सिंह विश्नोई, संतोष अहलावत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस बार निकाय और पंचायत चुनावों को पूरी गंभीरता से लेते हुए अनुभवी नेतृत्व को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस अगस्त से बढ़ाएगी चुनावी रफ्तार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पार्टी अगस्त के पहले सप्ताह से चुनावी तैयारियों को गति देगी। इसके तहत नगर कांग्रेस समितियों, जिला कांग्रेस समितियों और ब्लॉक स्तर पर लगातार बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की स्थिति और चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी।

डोटासरा ने बताया कि जिलों के प्रभारी कार्यकर्ताओं और आमजन से सीधे संवाद करेंगे तथा प्रत्येक जिले से राजनीतिक फीडबैक लेकर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों के चयन, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और चुनावी अभियान की दिशा तय की जाएगी। कांग्रेस का फोकस बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करने पर रहेगा।

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