अचानक हिली धरती… जयपुर से सीकर तक महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता

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Rajasthan earthquake

Rajasthan earthquake: राजस्थान के शेखावाटी में शनिवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 दर्ज की गई। जयपुर से सीकर तक लोगों के बीच इस भूकंप ने हड़कंप मचा दिया। हालांकि भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, शहर में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में झटकों के दौरान कंपन की आवाज रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। (Rajasthan earthquake)सुबह के समय आए इन झटकों से कुछ क्षेत्रों में लोगों ने हल्का कंपन महसूस किया, जिससे थोड़ी देर के लिए लोगों में उत्सुकता और हल्की चिंता का माहौल भी रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की क्षति की पुष्टि नहीं की गई है।

दो बार झटके महसूस हुए

लोग नींद में ही थे, और आंख नहीं खुली थी कि भूकंप के दो बार झटके महसूस हुए. ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, सुबह 6:33 बजे एकाएक धरती हिलने जैसा महसूस हुआ, लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकले. तभी एक बार और झटका महसूस हुआ. मुंबई से आया श्याम भक्त कैलाश अग्रवाल ने बताया, “मैंने जैसे ही गाड़ी रोकी, ऐसा लगा जैसे की मुझे चक्कर आ गया हो. कुछ समझ पाता उससे पहले ही दूसरा झटका भी महसूस हुआ, थोड़ी देर बाद पता चला कि चक्कर नहीं भूकंप आया है.”

जयपुर से 69 किलोमीटर दूर रहा भूकंप का केंद्र

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCFS) से मिली जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 32 मिनट 59 सेकंड पर भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र जयपुर से लगभग 69 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित था। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे बताया गया है। कम गहराई होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में हल्का कंपन महसूस किया गया।

विशेषज्ञों ने बताए अरावली क्षेत्र में भूकंप के कारण

भू-विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान के अरावली क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों के पीछे कई मानवीय कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें अवैध खनन, भारी विस्फोटकों का इस्तेमाल और भूजल का अत्यधिक दोहन प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण अरावली के नीचे मौजूद ग्रेट फॉल्ट लाइन, जिसे पूर्वी भ्रंश रेखा भी कहा जाता है, सक्रिय होती जा रही है। इससे जमीन के भीतर संतुलन प्रभावित होता है और कंपन की स्थिति बन सकती है।

भूकंपीय गतिविधि बढ़ने के संभावित कारण

अरावली क्षेत्र में भूकंप के पीछे कई कारकों को जिम्मेदार माना जा रहा है। जमीन के भीतर मौजूद फॉल्ट लाइन मानवीय गतिविधियों से सक्रिय हो सकती है, जिससे झटके महसूस होते हैं। इसके अलावा खनन कार्यों में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटक पहाड़ियों के अंदरूनी हिस्से को कमजोर करते हैं। वहीं 100 से 200 फीट से लेकर 900 फीट तक की गहराई से बड़े पैमाने पर भूजल निकासी भी जमीन के भीतर के संतुलन को प्रभावित कर रही है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पहाड़ियों को काटकर तेजी से हो रहा निर्माण कार्य और सुरंगों का निर्माण भी क्षेत्र की भू-संरचना को कमजोर बना रहा है, जिससे भविष्य में भूकंपीय गतिविधियों की संभावना बनी रह सकती है।

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