रक्षक बने भक्षक? होटल, नशीला पदार्थ और धमकी—महिला कांस्टेबल की कहानी ने सबको चौंकाया

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Police Crime

Police Crime: चूरू (राजस्थान)। राजस्थान के चूरू जिले से सामने आया मामला पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां एक महिला कांस्टेबल ने अपने ही विभाग के अधिकारियों और कर्मियों पर वर्षों तक यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। (Police Crime)पीड़िता का दावा है कि 2017 से 2025 तक उसके साथ यह सिलसिला चलता रहा।

ड्यूटी का बहाना, होटल में नशीला पदार्थ 

पीड़िता की शिकायत के अनुसार, इस भयावह कहानी की शुरुआत साल 2017 में हुई। एक साथी पुलिसकर्मी ने तड़के करीब 3:30 बजे फोन कर उसे ड्यूटी का हवाला देकर बुलाया। जब वह निर्धारित स्थान पर पहुंची, तो उसे जबरन एक होटल ले जाया गया।

महिला कांस्टेबल का आरोप है कि होटल में उसे नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश कर दिया गया और इसके बाद तत्कालीन थानाधिकारी (SHO) सहित चार पुलिसकर्मियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया।

पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद आरोपियों ने उसे धमकाया, वीडियो और अन्य सबूतों के नाम पर ब्लैकमेल किया और सालों तक उसका शारीरिक व मानसिक शोषण करते रहे।

SP तक पहुंची फरियाद, तीन आरोपियों पर FIR दर्ज

मामला तब सामने आया जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर जिला पुलिस अधीक्षक जय यादव से मुलाकात की और अपनी पूरी आपबीती साझा की। मामले की गंभीरता को देखते हुए SP ने तत्काल आंतरिक जांच के आदेश दिए।

प्रारंभिक जांच के बाद बुधवार को तीन नामजद पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी करवाया जा चुका है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

शिकायतकर्ता का विवादित रिकॉर्ड

इस सनसनीखेज मामले में एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, शिकायत करने वाली महिला कांस्टेबल पिछले दो महीनों से निलंबित चल रही है। उस पर ड्यूटी से गायब रहने और कुछ अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप हैं।

चूंकि मामला करीब 7 साल पुराना बताया जा रहा है और शिकायतकर्ता का पिछला रिकॉर्ड भी विवादित रहा है, ऐसे में पुलिस इस पूरे प्रकरण को हनीट्रैप, आपसी रंजिश या दबाव बनाने की कोशिश के नजरिए से भी जांच रही है।

सवालों के घेरे में पुलिस सिस्टम

फिलहाल यह मामला शुरुआती जांच में है, लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह राजस्थान पुलिस के लिए एक बड़ी शर्मनाक चुनौती होगी। वहीं, अगर आरोप झूठे निकलते हैं, तो यह कानून व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण माना जाएगा। सच क्या है? इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच और सबूत तय करेंगे, लेकिन फिलहाल चूरू पुलिस और पूरा सिस्टम सवालों के कठघरे में खड़ा है।

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